मैगी के बाद यिप्पी नूडल्स पर भी लगेगा प्रतिबंध
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैगी के बाद अब एक और कंपनी का नूडल्स जांच में सेहत के लिए खतरनाक पाया गया है। मैगी पर हुई कार्रवाई के दौरान कानपुर, आगरा व अलीगढ़ से आईटीसी लि. द्वारा निर्मित सनफीस्ट यिप्पी नूडल्स के नमूने भी लैब टेस्टिंग के लिए भेजे गए थे।
लैब टेस्टिंग के बाद जारी रिपोर्ट इसे भी बच्चों की सेहत के लिए खराब माना गया। इसमें भी भारी लेड की मात्रा तय मानकों से अधिक मिली है। इसके बाद एफएसडीए मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए यिप्पी नूडल्स की सघन जांच कराने के लिए प्रदेश भर में सर्विलांस सैंपलिंग का निर्देश जिला प्रभारियों को दिया है।
यह जानकारी एफएसडीए के सहायक आयुक्त फूड विजय बहादुर ने दी। उन्होंने बताया कि तीनों शहर से नमूने लैब टेस्टिंग के लिए लखनऊ जन विश्लेषक प्रयोगशाला में भेजे गए थे। जहां जांच में इसमें लेड की मात्रा मानक से काफी ज्यादा मिली है।
इसलिए इसका सेवन भी बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक है। तीनों शहर के नमूनों की लैब टेस्टिंग रिपोर्ट केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) को भी भेज दी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि अगले एक सप्ताह में जिले में बिकने वाले उक्त ब्रांड के नूडल्स के नमूने सर्विलांस सैंपलिंग के तहत लैब टेस्टिंग के लिए भेजें।
सहायक आयुक्त ने बताया कि सर्विलांस सैंपलिंग के नमूनों की जांच में भी अगर यिप्पी नूडल्स में लेड की मात्रा मानक से अधिक मिली तो मैगी की तरह इसकी बिक्री, भंडारण व निर्माण पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।
कंपनी ने दी सुरक्षित होने की सफाई
दूसरी तरफ सनफीस्ट यिप्पी नूडल्स के निर्माण से जुड़ी आईटीसी लि. कंपनी के एक अधिकारी जीके सुरेश का कहना है कि अभी तक सरकार के किसी भी विभाग से कंपनी को नमूना फेल होने की कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। कंपनी अपने उत्पाद लैब जांच के बाद ही बाजार में बेचती है।
इसके लिए रूटीन स्तर पर तैयार सनफीस्ट ब्रांड के यिप्पी नूडल्स के सात सौ नमूनों की जांच भी एफएसएसएआई से मान्य एनएबीएल लैब के साथ ही इटली, जापान व सिंगापुर तक की फूड लैब से कराई गई। इसमें लेड की मात्रा शून्य मिली।
मैगी में था एमएसजी के साथ आठ अधिक लेड
देश भर प्रतिबंध से पहले अलग अलग एफएसडीए लैब में जांचे गए मैगी नमूनों में सेहत के लिए जानलेवा लेड की मात्र तय मानक से सात से आठ गुना तक अधिक थी।
बाराबंकी में सप्लाई हुए जिस बैच की निर्मित मैगी के नमूने की लैब जांच के बाद हंगामा मचा था उसमें लेड की मात्रा 17.2 पाटर्स प्रति मिलियन थी जबकि मानक के अनुसार इसकी मात्र 2.7 पाटर्स प्रति मिलियन तक ही सुरक्षित व स्वीकार है। इसके साथ ही नमूना मैगी की जांच में एमसीजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) भी बिना वैधानिक चेतावनी के उपस्थित पाया गया।
एक्ट में उल्लेखित प्रावधान के अनुसार एमएसजी की नाम मात्र की उपस्थिति भी खाद्य सामग्री में मिली होने पर इसके रैपर पर 12 साल तक के बच्चों के उपयोग में न लाए जाने संबंधी वैधानिक चेतावनी छपवाना उत्पादक फर्म के लिए अनिवार्य होता है।