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यादव सिंह के जरिये कसेगा सपा-बसपा पर शिकंजा!

Wed, 10 Dec 2014 11:49 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 10 Dec 2014 11:49 AM IST
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BJP to Use Yadav Singh Against SP and BSP in 2017 Elections

यादव सिंह प्रकरण ने सपा और बसपा पर केंद्र का शिकंजा कसने का भी रास्ता खोल दिया है। नोएडा अथॉरिटी का चीफ इंजीनियर रहा यादव सिंह भले ही आज शिकंजे में फंसा हो, लेकिन उसके घपले-घोटालों का चिट्ठा बहुत पुराना है।

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राजनीतिज्ञों से साठगांठ करके और फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने में भी उसे महारत हासिल रही है। भाजपा ने उसकी करतूतों का चिट्ठा वर्ष 2011 में ही खोल दिया था और बसपा के महत्वपूर्ण नेताओं से साठगांठ करके करोड़ों के वारे-न्यारे करने के दस्तावेज सार्वजनिक किए थे।
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पार्टी ने केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार से कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन किन्हीं कारणों से यह मामला दब गया। साफ है कि अब शुरू हुई कार्रवाई कहीं न कहीं पुराने घटनाक्रम से जुड़ी है।
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आने वाले दिनों में केंद्र की भाजपा सरकार भी इस प्रकरण की आड़ में सूबे के दोनों प्रमुख दलों को अपने इशारे पर चलने को मजबूर कर सकती है।

भाजपा ने बसपा से साठ-गांठ की थी उजागर

BJP to Use Yadav Singh Against SP and BSP in 2017 Elections

भाजपा की घोटाला उजागर समिति के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष किरीट सोमैया ने पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही के साथ लखनऊ में यादव सिंह के सूबे की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार और बसपा सरकार में काफी प्रभावी माने जाने वाले सतीशचंद्र मिश्र के साथ कारोबारी रिश्तों की बात दस्तावेजी सुबूतों के साथ सार्वजनिक की थी।

आरोप लगाया था कि आनंद कुमार व सतीश मिश्र ने फर्जी कंपनियां बनवाईं। इन कंपनियों में एक का शेयर दूसरे को ऊंचे दामों पर बिक्री दिखाकर 10,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया।

कंपनियों के समूह में भी यादव सिंह: भाजपा ने संकल्प एडवाइजरी सर्विस प्रा. लि., विजय फिनकॉन कंसल्टेंट प्रा. लि., त्रिवेणी स्मार्ट एजूकेशन प्रा. लि., यमुनोत्री इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डवलपर्स प्रा. लि., वृंदावन इन्वेस्टमेंट प्रा. लि., फ्रेंड्स मोटल प्रा. लि., दिया रिलेटर्स प्रा. लि. सहित 125 कंपनियों को आनंद कुमार समूह में शामिल बताया था।

कहा था कि इन सभी कंपनियों का काम अज्ञात स्रोतों से आने वाली हजारों करोड़ की आय और वायदा कारोबार से आने वाली विवादित रकम के निवेश का रास्ता बनाना है। इनमें आनंद कुमार, डॉ. सुखदेव कुमार, दीपक बंसल, यादव सिंह, सतीशचंद्र मिश्र का बेटा कपिल सतीश मिश्र व अन्य लोग शामिल हैं।

भाजपा ने दी थी चुनौती

BJP to Use Yadav Singh Against SP and BSP in 2017 Elections

सोमैया ने आनंद कुमार और यादव सिंह का नाम लेते हुए  तत्कालीन मुख्यमंत्री को आरोपों को गलत साबित करने की चुनौती भी दी थी। कहा था, ‘क्या यह गलत है कि आनंद कुमार समूह और कपिल सतीश मिश्र ने 2007 में दिया रिलेटर्स प्रा. लि. की स्थापना कर हजारों करोड़ रुपये का बेनामी लेन-देन किया।

आनंद कुमार समूह के सदस्य और नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने मनमाने ढंग से अपने व अपने परिवारीजनों के नाम से दर्जनों कंपनियां बनाई है और उसके जरिये हजारों करोड़ का घोटाला किया है।

जाहिर है आयकर विभाग हो या अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां, इनकी तरफ से शुरू की गई नई जांचों का सिरा कहीं न कहीं भाजपा की ओर से 2011 में लगाए गए आरोपों व सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से जरूर जुड़ा है।

इसलिए सपा पर भी दबाव: बसपा सरकार के बाद सपा सरकार में भी यादव सिंह जिस तरह अहम भूमिका में बना रहा, उसके चलते सपा भी खुद को पाक-साफ नहीं कह सकती।

सूबे में सत्ता बदलने के बाद से ही भाजपा सपा सरकार पर मायाराज के भ्रष्टाचार के आरोपी व दागी अधिकारियों पर मेहरबान होने के आरोप लगाती रही है। जाहिर है वह इस मुद्दे पर राजनीतिक खेल खेलने से क्यों परहेज करेगी।

2017 का चुनाव भी एक प्रमुख वजह

BJP to Use Yadav Singh Against SP and BSP in 2017 Elections

भाजपा का निकट भविष्य में सबसे बड़ा लक्ष्य 2017 में यूपी में सरकार बनाना है। सरकार तभी बन सकती है जब सपा और बसपा हर तरह से कमजोर हों। न सिर्फ साख के सवाल और ईमानदारी के मुद्दे पर कठघरे में खड़ी दिखाई दें बल्कि जमीनी स्तर पर भी दोनों पार्टियों की जड़ें काफी कमजोर कर दी जाएं।

भाजपा के इस काम को पूरा करने में यादव सिंह प्रमुख कड़ी हो सकता है। केंद्र में सरकार में होने के नाते भाजपा इस प्रकरण के बहाने दोनों दलों को सड़क पर रक्षात्मक भूमिका में रहने और सदन में किसी न किसी रूप से सहयोग करने को विवश कर सकती है।

वैसे भी भाजपा की केंद्र सरकार को बीमा संशोधन विधेयक, श्रम कानून संशोधन विधेयक, भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन विधेयक सहित कुछ विधेयकों को कानून के रूप में परिवर्तित कराने के लिए राज्यसभा में दूसरे दलों की मदद की जरूरत है।

इन हालात में भाजपा राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष के आक्रमण को कमजोर करने के लिए सपा व बसपा पर दबाव बढ़ा सकती है।

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