भ्रष्ट यादव को सजा देंगे अखिलेश, कल गिरेगी गाज!
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यूपी सरकार के भ्रष्ट अफसर यादव सिंह के खिलाफ कब तक कार्रवाई की जाएगी ये बात तो साफ नहीं मगर सुप्रीम कोर्ट से किए गए अखिलेश सरकार के वादे के बाद ये बात तो तय है कि इस चीफ इंजीनियर का डिमोशन जल्द ही हो जाएगा।
अखिलेश सरकार ने कोर्ट से गड़बड़ प्रमोशन सिस्टम को सुधार लेने का वादा किया था। हालांकि विकलांग दिवस पर एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने ये बात दोबारा कही कि रिपोर्ट आने के बाद यादव सिंह पर कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के हवाले से ये भी पता चला है कि कल तक रिपोर्ट आ जा जाएगी और यादव सिंह पर जल्द ही गाज गिरेगी।
अखिलेश क्या कार्रवाई करेंगे ये वक्त बताएगा। 21 नवंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया था कि 1995 से ‘रिजर्वेशन में प्रमोशन’ स्कीम के तहत हुए सारे एससीएसटी प्रमोशन को वापस ले लेगी।
राज्य सरकार ने दिसंबर तक ऐसा करने का वादा किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक जाटव बिरादरी के यादव सिंह को 1995 से धड़ाधड़ प्रमोशन मिले हैं।
नोएडा अथॉरिटी ने ताक पर रखे नियम
हैरानी की बात ये है कि उस वक्त उन्होंने नोएडा अथॉरिटी में बतौर प्रोजेक्ट इंजीनियर पद संभाला था जबकि उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। लेकिन, नोएडा अथॉरिटी में यादव के लिए सभी नियम ताक पर रख दिए गए।
27 अप्रैल, 2012 में सुप्रीमकोर्ट ने प्रमोशन में कोटा स्कीम को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए रद्द कर दिया था और यूपी सरकार से एससीएसटी सहित ऐसे सारे प्रमोशन वापस लेने के लिए कहा था। मगर यूपी सरकार ने इस बात का पालन नहीं किया।
2012 में सपा सरकार के आते ही यादव को भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया गया। यादव को 954 करोड़ रुपये के एक घोटाले में शामिल बताया गया, लेकिन 2013 में न जाने किस वजह से यादव का सस्पेंशन खत्म हो गया।
नवंबर, 2014 में यादव पर सपा सरकार फिर मेहरबान हुई। अब यादव को यूपी की सबसे बड़ी और मालदार मानी जाने वाली नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी का चार्ज दे दिया गया।
...तो अखिलेश आते अवमानना के घेरे में
यूपी सरकार से इंजीनियर्स का एक गुट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और राज्य सरकार पर न्यायालय की अवमानना लगाने की दरख्वास्त की क्योंकि सरकार ने कोर्ट के प्रमोशन वापस लेने के आदेश का पालन नहीं किया था।
एक याचिकाकर्ता अमर कुमार के वकीलदावा किया कि 21 नवंबर को राज्य सरकार ने ये कमियां स्वीकारीं और कोर्ट को मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि तीन सप्ताह के अंदर इस बात पर पालन होगा।
अगली सुनवाई 2 जनवरी, 2015 को होगी। यूपी इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अख्तर अली फारूकी ने बताया कि अगर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से किया हुआ वादा निभा दिया तो यादव सिंह का डिमोशन पक्का है।
हालांकि उन्होंने ये बात भी कही कि यादव सिंह इस एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं क्योंकि इसके लिए इंजीनियरिग की डिग्री होना जरूरी है।
बीजेपी ने भी सपा की आलोचना
यादव सिंह पर पड़े इनकम टैक्स के छापे और कार्रवाई को लेकर सपा सरकार की चुप्पी पर भाजपा ने जमकर आलोचना की। पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने मंगलवार को यहां कहा कि प्रदेश सरकार को बताना चाहिए कि दागियों पर सरकार की मेहरबानी का राज क्या है।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री आजम खां कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को सही जानकारी नहीं हो पाती है। वह यह भी कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री की जानकारी के बगैर नियुक्तियां हो रही हैं। जब मुख्यमंत्री को जानकारी नहीं है तो किसके पास है?
आजम की इस बात ने लोगों को असमंजस में डाल दिया है। पाठक ने कहा कि आजम खां की सफाई ने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार कौन चला रहा है।
यादव पर सवाल-जवाब करने पर निपटे थे बाबू!
क्या यादव सिंह पर सवाल-जवाब करने पर ही एक सीनियर आईएएस अफसर को इंडस्ट्रीज के मुख्य सचिव के पद से हाथ धोना पड़ा था?
उनका कुसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने नोएडा अथॉरिटी के एक सीनियर अफसर से ये जानना चाहा था कि यादव खिलाफ के जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें क्यों बहाल कर दिया गया?
राज्य सरकार के सूत्रों के मुताबिक 2013 के आखिर में जब उस अफसर ने नोएडा अथॉरिटी से लिखित रूप से इस बात पर सफाई मांगी तो अफसर इस बात पर सफाई देने भागे-भागे लखनऊ तक आ पहुंचे। जब उस अफसर ने लिखित जवाब मांगा तो उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
एक सीनियर इनकम टैक्स अफसर के मुताबिक, जांच-पड़ताल के पहले चक्र में इंजीनियर्स, अकाउंटेंट और ऑडिटर वगैरह से पूछतांछ की जाएगी जबकि दूसरे चक्र में आईएएस अफसरों को बुलाया जा सकता है। राजनेताओं को इसके बाद बुलाया जाएगा।