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खतरे की आहटः विवादों से चिंतित भाजपा कोर कमेटियों को करेगी मजबूत
Sun, 30 Aug 2020 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 30 Aug 2020 05:08 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
कहीं विधायक और सांसद के बीच बयानबाजी तो कहीं विधायकों की सार्वजनिक नाराजगी से होने वाली सत्ता और संगठन की किरकिरी। समायोजन को लेकर रस्साकसी तथा जिलों के कुछ प्रभावी लोगों द्वारा अपने-अपने गुटों का वर्चस्व स्थापित करने की खींचतान। इससे चिंतित भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कोर कमेटियों को पुनर्गठित कर मजबूत करने का निश्चय किया है।
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जिलों में बनी इन कोर कमेटियों में पहले से मौजूद लोगों के अलावा संघ परिवार के प्रमुख संगठनों तथा पार्टी के अन्य प्रभावी लोगों को शामिल कर प्रदेश से मंडल तक संवाद और संपर्क की प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाएगा।
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दरअसल कुछ स्थानों पर विधायकों और सांसदों की एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी जिस तरह बढ़ती जा रही है, उससे भाजपा नेतृत्व को बड़े खतरे की आहट महसूस होने लगी है। ऊपर से इन शिकायतों ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है कि कुछ विधायक और सांसद आम कार्यकर्ताओं की सुनते ही नहीं हैं।
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खासतौर से दूसरे दलों से भाजपा में आकर चुनाव जीतने वाले। ये सिर्फ अपने-अपने गुटों को ही बढ़ावा देते हैं और हर वह कोशिश करते हैं जिससे उनके गुट के लोगों का स्थानीय स्तर पर रुतबा बना रहे।
भाजपा नेतृत्व को आभास हो गया है कि कोर कमेटी की व्यवस्था शिथिल होने के कारण ही जिलों में समस्याएं आ रही हैं। यदि कुछ वरिष्ठ लोगों का दबाव रहे और ये संदेश रहे कि इन वरिष्ठों की नजर में गलती आने पर कठोर दंड मिलेगा तो शायद ऐसा न हो।
इसी के मद्देनजर भाजपा ने कोर कमेटियों का पुनर्गठन कर इन्हें प्रभावी बनाने का फैसला किया है। इसके लिए पहले से बनी समितियों को पुनर्गठित कर संघ परिवार से संबंधित जिलों के अन्य प्रमुख लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा जिलों के पूर्व अध्यक्ष सहित वहां रहने वाले पूर्व प्रदेश पदाधिकारी भी शामिल किए जाएंगे।
ये कमेटियां स्थानीय स्तर पर किसी तरह के संगठनात्मक विवाद के मद्देनजर समाधान कराने की कोशिश करेंगी। इसके बावजूद यदि कोई नहीं मानेगा तो पार्टी नेतृत्व कठोर कार्रवाई करेगा। पार्टी नेतृत्व जिलों के बारे में निर्णय में इन कमेटियों की राय को महत्व देगा। ये कमेटियां एक तरह से प्रदेश नेतृत्व के लिए फीडबैक जुटाने का काम करेंगी।