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विश्व पर्यावरण दिवस: जहरीली होती हवा बन रही युवा दिलों की दुश्मन, बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले

Fri, 06 Jun 2025 03:28 PM IST
भूपेन्द्र सिंह विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 06 Jun 2025 03:28 PM IST
सार

विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईटीआर में आए प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. सीएन मंजूनाथ ने कई हैरान करने वाले खुलासे किए। उन्होंने युवाओं में बढ़ रहे हृदयघात की वजह- कोरोना वैक्सीन की अफवाह को नकारा। कहा कि वैक्सीन का दुष्प्रभाव छह माह से ज्यादा नहीं है। जहरीली होती हवा हार्ट के लिए अधिक खतरनाक है।

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World Environment Day Poisonous air becoming enemy of young hearts cases of heart attack are increasing
हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. सीएन मंजूनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस जहरीली हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह हमारे दिल को बीमार बना रही है। हाल के दिनों में युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक और कम उम्र में मौतों के बढ़ते मामले चौंकाने वाले हैं। हवा में मौजूद जहरीले कण व अन्य रसायन सांसों के जरिये खून में मिलकर दिल को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। जितना हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और अनियंत्रित डायबिटीज पहुंचाती है। तनाव और खराब लाइफस्टाइल इसमें आग में घी का काम कर रहे हैं।

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देश में हो रही 30 फीसदी मौतों की वजह कार्डियोवैस्कुलर बीमारी या हार्ट अटैक है और ऐसी मौतों में ज्यदातर मरीज युवा हैं, जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम है। जहरीली हो रही हवा युवाओं के दिलों के लिए इमर्जिंग रिस्क फैक्टर बन गया है।
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ये चौंकाने वाला खुलासा विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईटीआर में आयोजित कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को बेंगलुरु से आए विश्वप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. सीएन मंजूनाथ ने किया। उन्होंने यह जानकारी अपने कॅरियर के कई दशकों के अध्ययन के नतीजों के हवाले से दी।

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ऐसे दिल की दुश्मन बन रही है प्रदूषित हवा

अमर उजाला से खास बातचीत में डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि हवा में मौजूद जहरीले पीएम 2.5 कण व अन्य रसायन, सांसों से सीधा हमारे खून में पहुंच कर हमारी संवेदनशील धमनी नलिका की भीतरी परत में सूजन पैदा कर इन्हें भीतर से कमजोर और संकरा बना रहे है। 


बिगड़ी हुई हवा में सांस लेने वाला व्यक्ति रोजाना लगभग दो पैकेट सिगरेट जितना धुआं अपने फेफड़ों में भर रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों में हाई बीपी के साथ दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। इससे हमारी प्रतिरोधक क्षमता घटी है, स्थमा के मरीज बढ़ रहे, पैंक्रियाज की खराबी के अलावा, लो बर्थ रेट और महिलाओं में गर्भपात की घटनाएं बढ़ी हैं।

कोरोना वैक्सीन से दिल पर नुकसान की बात अफवाह

एक सवाल के जवाब में डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव वैक्सीन लगने के छह माह तक ही परिलक्षित होते हैं। कोविड वैक्सीनेशन को चार साल बीत गए। युवाओं में बढ़ रहे हृदयाघात का कोरोना वैक्सीन से दिल पर नुकसान का कोई कनेक्शन नहीं है। यह महज अफवाह है। युवाओं में हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं का ट्रेंड आज नहीं बल्कि पिछले 15 वर्षों से देखने को मिल रहा है।

6-एस और मोबाइल स्क्रीन से परहेज जरूरी

डॉ. मंजूनाथ ने स्ट्रेस, स्मोकिंग, साल्ट, शूगर, स्पिरिट(अल्कोहल) और सेडेंटरी लाइफ से परहेज करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि रोजाना 45 मिनट का एक्सरसाइज जीवन में 12 से 15 साल का इजाफा करता है। मोबाइल स्क्रीन के साथ ही फास्ट फूड से दूरी हृदय के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपनों से अपने दिल की बात शेयर करें, वर्ताव ठीक रखें, गुस्सा कम करें। 

उन्होंने दिलचस्प अंदाज में कहा कि कार पर आई खरोंच पर हम दूसरों पर चिल्लाते हैं, इससे कार से ज्यादा हमारे दिल को खरोंच पहुंचती है। पहले मां-बाप को उनके बच्चे दिल का इलाज कराने अस्पताल आते थे, अब मां-बाप अपने युवा बच्चों को दिल के इलाज के लिए अस्पताल ला रहे जो दु:खद है।

आयुष्मान भारत योजना में समयानुसार समीक्षा की जरूरत

डॉ. मंजूनाथ ने कर्नाटक में हृदयाघात के मरीजों के लिए 'पहले ट्रीटमेंट-बाद में पेमेंट' योजना चलाई। उनका कहना है कि सरकार की आयुष्मान भारत योजना देश के निर्धन मरीजों के लिए वरदान है, लेकिन इसमें समय समय पर प्रोसीजर आदि के शुल्क में बदलाव जरूरी है, नहीं तो मंहगाई के दौर में आयुष्मान- इंपैनल्ड अच्छे निजी अस्पताल इलाज से हाथ खड़े कर देंगे। सरकार पर काफी बोझ पड़ेगा। निर्धन मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने की जरूरत है और दिल के मरीजों के इलाज के लिए इनमें जिला स्तर पर आईसीयू की सुविधा बढ़ाने की जरूरत है।

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