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World Cancer Day : ब्लड कैंसर के मरीजों को मिलेगी राहत, बीएमटी का हब बनेगा यूपी, तैयार हो रहा है नेटवर्क

Sat, 04 Feb 2023 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Feb 2023 05:51 AM IST
सार

इससे ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों को राहत तो मिलेगी ही उन्हें समय पर इलाज भी मिल सकेगा। प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

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World Cancer Day: UP will become the hub of BMT
कैंसर दिवस... - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के मामले में उत्तर प्रदेश हब बनने जा रहा है। इससे ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों को राहत तो मिलेगी ही उन्हें समय पर इलाज भी मिल सकेगा। प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इसके लिए इंडियन सोसायटी ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन के यूपी चैप्टर ने सभी मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने की रणनीति अपनाई है। इसमें एसजीपीजीआई, केजीएमयू एवं लोहिया संस्थान अहम भूमिका निभाएंगे।

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प्रदेश में एसजीपीजीआई अब तक करीब 40 से ज्यादा मरीजों का बोन मैरो प्रत्यारोपण कर चुका है। केजीएमयू में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है और लोहिया संस्थान इसकी तैयारी में है। लखनऊ सहित अन्य शहरों के कॉरपोरेट अस्पताल भी इसे शुरू करने की तैयारी में हैं। एसजीपीजीआई सहित तीनों चिकित्सा संस्थानों में हर दिन औसतन पांच सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
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संस्थानों में आने वाले करीब 10 फीसदी गंभीर मरीजों में बोन मैरो प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। यूपी चैप्टर से जुड़े हेमेटोलॉजिस्ट डा. संजीव कुमार बताते हैं कि मरीजों में ब्लड कैंसर के लक्षण होने पर तत्काल उन्हें चिह्नित कर उपचार शुरू करने की जरूरत होती है। देरी होने से मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है।
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क्या है बोन मैरो ट्रांसप्लांट
एसजीपीजीआई केएसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि रक्त कैंसर के मरीजों में होने वाली बीमारी ल्यूकेमिया, लिंफोमा, एक्यूट लिम्फोटिक ल्यूकेमिया, अप्लास्टिक एनीमिया, प्राइमरी इम्यूनो डेफिशिएंसी सहित अन्य बीमारियों में बोन मैरो प्रत्यारोपण किया जाता है। बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा, हड्डियों के बीच पाए जाने वाला पदार्थ है। जब किसी मरीज का बोन मैरो ठीक से काम नहीं करता है तो अच्छी रक्त कोशिकाओं का उत्पादन नहीं होता है।


तब उसके परिवार के सदस्यों की जांच की जाती है, उनसे स्वस्थ्य अस्थि मज्जा लेकर मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाता है। केजीएमयू के हेमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एके त्रिपाठी बताते हैं कि रक्त कैंसर के मरीज में हीमोग्लोबिन गिरने की वजह से बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसे में इन्हें तत्काल उपचार की जरूरत होती है, लेकिन तमाम मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं।

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