कैसे रोकें हेराफेरी, अधिकारी ले रहे ट्रेनिंग
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केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग के अधिकारी लेखा व लागत लेखांकन
इसके बाद वे उत्पाद शुल्क में होने वाली चोरी और टैक्स को कम करने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले कागजात रोक सकेंगे। मंगलवार को शहर के द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के लखनऊ चैप्टर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई।
लागत लेखांकन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने वाले नामचीन सीएमए ने इस दौरान मौजूद उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग के 300 से ज्यादा अधिकारियों को लेखा व लागत लेखांकन की मूलभूत जानकारियां दीं।
प्रशिक्षण
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य आयुक्त (केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर)
करन के शर्मा और आईसीएआई के अध्यक्ष सीएमए एससी मोहंती ने संयुक्त रूप से
दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस मौके पर मुख्य
आयुक्त शर्मा ने कहा कि ज्यादातर मामलों में कार्रवाई के समय दिखाए जाने
वाले वित्तीय व लागत प्रपत्रों में दर्ज सूचना के बारे में सही जानकारी न
होने से ही गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने
विभागीय अधिकारियों को उत्पादक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वित्तीय
अभिलेख जैसे लाभ-हानि खाता, बैलेंसशीट व ट्रेडिंग अकाउंट के साथ स्टॉक
लेखांकन में जानबूझकर हेराफेरी कर उत्पाद शुल्क की वास्तविक निर्धारण राशि
कम कराने के बारे में बताया।
उत्पाद की मात्रा पर तय होता है उत्पाद शुल्क
आईसीएआई
के अध्यक्ष सीएमए एससी मोहंती ने कहा कि उत्पाद शुल्क का निर्धारण उत्पाद
की मात्रा व लागत पर तय होता है न कि लाभांश पर।
ज्यादातर मामलों में
उत्पादक कर चोरी या कर के कम निर्धारण के लिए अपने उत्पाद से जुड़े मनचाहे
स्तर पर तैयार लेखा व लागत लेखांकन से जुड़े प्रपत्र विभागीय अधिकारियों को
दिखाता है।
अब विषय की मूलभूत जानकारी होने पर विभागीय अधिकारी प्रस्तुत
वित्तीय व लागत अभिलेखों को ध्यान से पढ़कर उसकी स्क्रूटनी करेंगे। इसके
बाद ही कर का सत्यापन किया जाएगा।
कार्यशाला में केंद्रीय उत्पाद शुल्क के
लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, फर्रुखाबाद व अलीगढ़ मंडल कार्यालयों से जुडे़ उप
सहायक आयुक्त सहित अन्य अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर सीएमए
राकेश भल्ला, अरविंद कुमार, विजेंद्र शर्मा ने व्याख्यान दिया।