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धुआं रहित चूल्हा कम करेगा कार्बन का प्रभाव
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प्रदूषण नियंत्रण में कारगर है वुड गैसीफायर
बीबीएयू में नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस मुरलीधर का व्याख्यान
लकड़ी जलाने पर निकलने वाला धुआं वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ता है। कुछ अन्य गैसें भी वातावरण को प्रदूषित करती हैं। यदि इन गैसों को वातावरण में जाने से रोका जाए तो कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नियंत्रित की जा सकती है। वुड गैसीफायर में लकड़ी जलाने पर भी काफी कम धुआं निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं फैलता। नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस मुरलीधर राव ने यह जानकारी दी।
वे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में ‘कार्बन निगेटिव एप्रोच- यूनिक सॉल्यूशन फॉर ग्लोबल वार्मिंग’ विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि धुआं रहित चूल्हा और स्वविकसित गैसीफायर उपकरण इसके लिए काफी उपयोगी हैं। इस चूल्हे में ऑक्सीजन के जाने के लिए कई छेद हैं, जिससे लकड़ी बिना अधिक धुआं किए जलती है। साथ ही लकड़ी जलाने के बाद जो अपशिष्ट बचता है उससे बायोचार बनता है, जिसे खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी में बायोचार को मिलाने से उसकी उर्वरा क्षमता भी बढ़ती है। प्रो. कमान सिंह व प्रो. बीएस भदौरिया ने डॉ. राव का स्वागत किया।
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बीबीएयू में नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस मुरलीधर का व्याख्यान
लकड़ी जलाने पर निकलने वाला धुआं वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ता है। कुछ अन्य गैसें भी वातावरण को प्रदूषित करती हैं। यदि इन गैसों को वातावरण में जाने से रोका जाए तो कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नियंत्रित की जा सकती है। वुड गैसीफायर में लकड़ी जलाने पर भी काफी कम धुआं निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं फैलता। नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस मुरलीधर राव ने यह जानकारी दी।
वे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में ‘कार्बन निगेटिव एप्रोच- यूनिक सॉल्यूशन फॉर ग्लोबल वार्मिंग’ विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि धुआं रहित चूल्हा और स्वविकसित गैसीफायर उपकरण इसके लिए काफी उपयोगी हैं। इस चूल्हे में ऑक्सीजन के जाने के लिए कई छेद हैं, जिससे लकड़ी बिना अधिक धुआं किए जलती है। साथ ही लकड़ी जलाने के बाद जो अपशिष्ट बचता है उससे बायोचार बनता है, जिसे खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी में बायोचार को मिलाने से उसकी उर्वरा क्षमता भी बढ़ती है। प्रो. कमान सिंह व प्रो. बीएस भदौरिया ने डॉ. राव का स्वागत किया।
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