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Lucknow News: महिलाएं खुद को कमजोर न समझें, पुरुषों पर भी बने धारावाहिक

Tue, 18 Nov 2025 02:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Tue, 18 Nov 2025 02:47 AM IST
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Women should not consider themselves weak, serials should also be made on men.
राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करतीं लविवि की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना। -अमर उजाला
लखनऊ। गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सोमवार से ''समर्थ नारी व समृद्ध भारत'' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने कहा कि हर धारावाहिक के केंद्र में महिलाएं ही क्यों होती हैं। पुरुषों पर आधारित धारावाहिक भी बनने चाहिए। महिलाएं खुद को कमजोर न समझें और न ही उन्हें कमजोर समझा जाए। सामाजिक बदलाव में पुरुष और महिला दोनों की बराबर की जिम्मेदारी है। सभी को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए।
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संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने कहा कि सुरक्षा व सुरक्षा का भाव दोनों ही देना जरूरी है। यह सम्मान व आत्मीयता का प्रतीक है। सुझाव दिया कि घरों में ऐसी किताबें रखी जाएं जिनसे बच्चों में आदर्श जीवन-मूल्यों का विकास हो। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. कविता बिसारिया ने कहा कि नारी का सशक्त होना ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी है।
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भोपाल परिसर की डॉ. अर्चना दुबे ने कहा कि नारी स्वतंत्र भी रहे और सुरक्षित भी। यह संतुलन परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। नारी की समरसता मूलरूप से भारतीय संस्कृति की मर्यादा बनाए रखने में है। भोपाल से डॉ. संगीता गुंडिचा ने कहा कि महिलाओं को प्रबुद्ध करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर नेतृत्व करने में अत्यंत उपाधि सिद्ध होगा।
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कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के डीन प्रो. शिवानी ने कहा कि भारतीय नारी का विचार भारतीय परंपरा की अनमोल धरोहर है। शोभा बाजपेयी ने कहा कि प्राचीन भारत में अरुंधति जैसी स्त्रियां पुरुष ऋषियों के समकक्ष स्थान रखती थीं। डॉ. रानी दधीचि ने कहा कि भारतीय संस्कृति स्त्री को सदैव ज्ञान, धैर्य और परामर्श का स्रोत मानती है। लीना सक्सेना ने कहा कि आज की स्त्री स्वतंत्रता और मंच पर बोलने का अधिकार 150 वर्ष पूर्व की स्त्रियों के कठोर संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लंबे संघर्ष को भी प्रेरक उदाहरण बताया। अधिवक्ता शिखा सिन्हा ने स्त्री अधिकारों, कानूनी जागरूकता और सुरक्षा कानूनों की अनिवार्यता पर बल दिया।

राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करतीं लविवि की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना। -अमर उजाला

राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करतीं लविवि की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना। -अमर उजाला

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