1090 पावर लाइन की पोस्टर गर्ल की कहानी रुला देगी आपको
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बुधवार को इस बारे में आईजी वीमेन सेल नवनीत सिकेरा ने जानकारी दी। उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर इस घटना के बारे में बताया और रुचिका की तस्वीर व पावर लाइन का चेहरा बना रुचिका की तस्वीर वाला पोस्टर शेयर किया।
इस दौरान उन्होंने रुचिका से मिलने और उसके पावर लाइन पोस्टर गर्ल बनने की कहानी को पोस्ट किया। रुचिका ने एमिटी यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन का कोर्स किया था। सिकेरा ने बताया कि जनवरी में रुचिका की स्मृति में पावरलाइन विभिन्न गतिविधियां आयोजित करेगा।
बहुत से कार्यों में से एक था दो मिनट की एक फिल्म क्लिप का बनाया जाना। अपने मोबाइल फोन में सर्च किया कि किसे बुलाऊं, सबसे पहले रुचिका का ध्यान आया। कॉल किया, लेकिन उसका फोन बंद था।
याद आया कि एक बार मैं एक कॉफी हाउस में बैठा था, जहां एक जानी पहचानी सी लड़की ने नमस्ते किया। मैंने तुरंत पहचान लिया कि वह रुचिका थी। उसने बताया कि उसने पुराना जॉब छोड़ दिया था और नया जॉब मुंबई में शुरू किया है।
दो महीने में सिलेक्ट हुआ था डिजाइन
यह याद आते ही फोन काट दिया और उसके एक दोस्त को कॉल किया। थोड़ी देर में ही वह युवा मेरे ऑफिस में था। उसकी आंखे लाल थीं, पूछा तो बोला तेजी से मोटरसाइकिल से आया है और हेलमेट का शीशा टूटा हुआ है।
तेज ठंडी हवा लगने से आंखों में पानी आ गया। उसने पूछा कि अचानक आपने मुझे ही क्यों बुलाया। मैंने कहा 1090 के लिए रुचिका और तुमने साथ ही काम किया था। जो शानदार डिजाइन 1090 को दी है, उसे कौन भूल सकता है।
आज हमारे पोस्टर पर चेहरे पर मुस्कान लिए, आत्मविश्वास से भरी लड़की पूरे देश में 1090 की पहचान बन गई है। मैं बताता चलूं कि इस डिजाइन तक पहुंचने में लगभग दो माह लग गए और सैकड़ों डिजाइन रिजेक्ट करने के बाद यह डिजाइन सामने आई थी और एक नजर में ही भा गई थी।
उस लड़के ने चौंकते हुए बताया कि सर आपको पता है रुचिका कहां है? मैंने कहा हां एक बार कॉफी हाउस में मुलाकात हुई थी। लड़का बोला - नहीं सर, वह अब किसी जॉब में नहीं है, वह अब इस दुनिया में ही नहीं है।
ऐसा लगा पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई
मुझे ऐसा लगा जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई। सहसा विश्वास नहीं हुआ। उस लड़के ने सांस पूरी होने से पहले बात कह दी और आंखों में आंसू छलक आए।
उसने बताया कि तीन महीने पहले एक ट्रक ने उसकी कार को रौंद दिया था। यह अत्यंत भावुक पल था, जिस लड़की ने 1090 को पहचान दी, आज वह नहीं है। अभी थोड़ी देर पहले मैं उससे बात करने की सोच रहा था।
घर जाने के लिए गाड़ी में बैठा। सड़क पर सामने 1090 का बैनर दिखा और उसमें वह आत्मविश्वास से लबरेज मुस्कराता चेहरा, एक पल को लगा शायद रुचिका ही है।
- (जैसा नवनीत सिकेरा ने अपनी वॉल पर लिखा)