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Lucknow News: महिलाओं की आस, नई तकनीक से मिटेंगे बर्न के निशान
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संजय गांधी पीजीआई।
लखनऊ। शरीर पर जलने के निशान से असहज महसूस करने वाली महिलाओं के लिए संजय गांधी पीजीआई ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। संस्थान में कॉर्बन लेजर की सहायता से शरीर पर मौजूद बर्न के निशान मिटाए जा रहे हैं।
संस्थान के प्रो. अंकुर भटनागर के अनुसार, जलने की घटनाएं महिला या पुरुष किसी के भी साथ हो सकती हैं, लेकिन खाना पकाने और अन्य सामाजिक कारणों से महिलाओं के साथ जलने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इससे शरीर पर पड़े जले के निशान उन्हें असहज बनाते हैं। इसके लिए संस्थान में कॉर्बन लेजर मशीन आई थी। इस मशीन से महिलाओं का इलाज शुरू किया गया। इसमें हर सप्ताह कुछ समय के लिए मशीन के सामने बैठना होता है। तीन से चार सप्ताह में देखा गया कि जलने के निशान 60 फीसदी तक कम हो गए।
नाममात्र का शुल्क
इस तकनीक से इलाज के लिए मरीज को ज्यादा शुल्क भी नहीं चुकाना पड़ता है। परचा बनवाने के बाद मुश्किल से पांच सौ रुपये में ही इलाज हो जाता है।
कमजोर हो जाता है महिलाओं का आत्मविश्वास
प्लास्टिक सर्जरी विभाग की डॉ. अनुपमा सिंह और आईना अग्रवाल के मुताबिक, जलने के निशान अक्सर महिलाओं के आत्मविश्वास को कम कर देते हैं, खासकर जब ये चेहरे या शरीर के खुले हिस्सों पर हों। इस नई तकनीक से ऐसी महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। इस तकनीक से न केवल निशान की गहराई कम होती है, बल्कि त्वचा की रंगत भी काफी हद तक सामान्य हो जाती है।
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तकनीकी प्रक्रिया और लाभ
लेजर और कॉबर्न डाई ऑक्साइड आधारित यह तकनीक त्वचा की ऊपरी परतों को लक्षित करती है, जिससे निशान वाले ऊतक धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और नई स्वस्थ त्वचा का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुरक्षित है और इसके दुष्प्रभाव भी कम हैं।
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संस्थान के प्रो. अंकुर भटनागर के अनुसार, जलने की घटनाएं महिला या पुरुष किसी के भी साथ हो सकती हैं, लेकिन खाना पकाने और अन्य सामाजिक कारणों से महिलाओं के साथ जलने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इससे शरीर पर पड़े जले के निशान उन्हें असहज बनाते हैं। इसके लिए संस्थान में कॉर्बन लेजर मशीन आई थी। इस मशीन से महिलाओं का इलाज शुरू किया गया। इसमें हर सप्ताह कुछ समय के लिए मशीन के सामने बैठना होता है। तीन से चार सप्ताह में देखा गया कि जलने के निशान 60 फीसदी तक कम हो गए।
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नाममात्र का शुल्क
इस तकनीक से इलाज के लिए मरीज को ज्यादा शुल्क भी नहीं चुकाना पड़ता है। परचा बनवाने के बाद मुश्किल से पांच सौ रुपये में ही इलाज हो जाता है।
कमजोर हो जाता है महिलाओं का आत्मविश्वास
प्लास्टिक सर्जरी विभाग की डॉ. अनुपमा सिंह और आईना अग्रवाल के मुताबिक, जलने के निशान अक्सर महिलाओं के आत्मविश्वास को कम कर देते हैं, खासकर जब ये चेहरे या शरीर के खुले हिस्सों पर हों। इस नई तकनीक से ऐसी महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। इस तकनीक से न केवल निशान की गहराई कम होती है, बल्कि त्वचा की रंगत भी काफी हद तक सामान्य हो जाती है।
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तकनीकी प्रक्रिया और लाभ
लेजर और कॉबर्न डाई ऑक्साइड आधारित यह तकनीक त्वचा की ऊपरी परतों को लक्षित करती है, जिससे निशान वाले ऊतक धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और नई स्वस्थ त्वचा का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुरक्षित है और इसके दुष्प्रभाव भी कम हैं।