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Lucknow News: महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले गुर्दे की बीमारी की ज्यादा आशंका
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ। गुर्दे की बीमारी में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। इससे लोग मर्ज से अनजान रहते हैं। यही वजह है कि गुर्दा रोग गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। लोगों को चाहिए कि हर छह माह के भीतर पेशाब में प्रोटीन की जांच जरूर कराएं। सीरम और क्रिटिनिन की जांच कराएं। इन जांचों से बीमारी को शुरुआत में पकड़ा जा सकता है। इलाज से गुर्दे की बीमारी को काबू किया जा सकता है। ऐसे लोगों को और अधिक सर्तक रहने की जरूरत है। जिनके परिवार का कोई सदस्य गुर्दे की बीमारी से पीड़ित है। यह जानकारी पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने शनिवार को इंडियन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन में कहीं।
नेफ्रोलॉजी विभाग के डा. अनुपमा कौल का कहना है कि महिलाओं में प्रजनन प्रक्रिया के दौरान कई तरह के बदलाव होते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव, असमान्य बीपी, असुरक्षित गर्भपात, पेशाब से सम्बंधित संक्रमण और पेशाब को अधिक समय तक रोकने से गुर्दे रोग की समस्या हो सकती है। महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले गुर्दे की बीमारी होने की आशंका अधिक होती है, लेकिन गुर्दा प्रत्यारोपण पुरुषों का ज्यादा होता है। जबकि महिलाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, छह लोगों में गुर्दा प्रत्यारोपण होता है इनमें पांच पुरुष एक और एक महिला होती है। गुर्दा दान करने वालों में महिलाएं ज्यादा होती हैं।
डॉ. रवि शंकर कुशवाहा ने कहा कि गुर्दा प्रत्यारोपण के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। यूपी के सभी अस्पतालों में हर वर्ष करीब 400 प्रत्यारोपण हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में पेरिटोनियल डायलिसिस फ्लूइड,हीमोडायलिसिस तकनीक,और डायलिसिस समेत दूसरी उपयोगी उपकरण में बनने के बाद इलाज और भी सस्ता होगा।
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नेफ्रोलॉजी विभाग के डा. अनुपमा कौल का कहना है कि महिलाओं में प्रजनन प्रक्रिया के दौरान कई तरह के बदलाव होते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव, असमान्य बीपी, असुरक्षित गर्भपात, पेशाब से सम्बंधित संक्रमण और पेशाब को अधिक समय तक रोकने से गुर्दे रोग की समस्या हो सकती है। महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले गुर्दे की बीमारी होने की आशंका अधिक होती है, लेकिन गुर्दा प्रत्यारोपण पुरुषों का ज्यादा होता है। जबकि महिलाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, छह लोगों में गुर्दा प्रत्यारोपण होता है इनमें पांच पुरुष एक और एक महिला होती है। गुर्दा दान करने वालों में महिलाएं ज्यादा होती हैं।
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डॉ. रवि शंकर कुशवाहा ने कहा कि गुर्दा प्रत्यारोपण के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। यूपी के सभी अस्पतालों में हर वर्ष करीब 400 प्रत्यारोपण हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में पेरिटोनियल डायलिसिस फ्लूइड,हीमोडायलिसिस तकनीक,और डायलिसिस समेत दूसरी उपयोगी उपकरण में बनने के बाद इलाज और भी सस्ता होगा।
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