मिसाल: मरने के बाद इस किसान ने पांच लोगों को दी नई जिंदगी
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परहित की मिसाल बन चुके बंथरा निवासी किसान राकेश कुमार सिंह (42) के अंगों से पांच लोगों को नया जीवन मिलेगा। बिजली पोल पर चढ़कर लाइट ठीक करते समय गिरने से उनके सिर में चोट आई थी। उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया।
उनकी पत्नी मालती देवी की रजामंदी से उनके अंगदान का निर्णय लिया गया। राकेश का लिवर इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलयरी साइंसेज (आईएलबीएस) दिल्ली, एक किडनी राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली और दूसरी किडनी एम्स दिल्ली को भेज दी गई।
जबकि दोनों कॉर्निया केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग को दी गई। बृहस्पतिवार देर रात लगभग आठ बजे उनके अंगों को निकालने की प्रक्रिया केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल में शुरू हुई।
रात को 11 बजे के करीब ग्रीन कॅरिडोर बनाकर राकेश के अंगों को चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट भेजा जाएगा। जहां विशेष विमान से सभी अंग दिल्ली भेजे जाएंगे।
मौत उन्हें खींच लाई थी स्कूल
किसान राकेश कुमार सिंह समाजसेवी प्रवृत्ति के थे। 29 अगस्त को वह बंथरा के सैदपुर पुरही प्राथमिक विद्यालय किसी काम से गए थे। तभी वहां की शिक्षिका ने स्कूल में बिजली न आने की जानकारी उन्हें दी और कहा कि वह बिजली ठीक कर दें।
राकेश कुमार ने सीढ़ी ली और पोल पर बिजली ठीक करने चढ़ गए लेकिन अचानक किसी कारण उनका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे आ गिरे। ऊंचाई से गिरने के कारण उनके सिर में चोट लग गई और वह घटनास्थल पर ही बेहोश हो गए।
गांव वालों की मदद से उन्हें आनन-फानन में केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। जहां जांच में पता चला कि राकेश की सिर में अधिक चोट आई है। इसकी वजह से उनकी ब्रेन डेथ हो गई थी।
पति रहें अमर, इसलिए अंगदान को राजी हुईं पत्नी
डॉक्टरों ने इसकी जानकारी उनकी पत्नी मालती देवी को दी। काउंसलर पीयूष, क्षितिज व अश्वनी सिंह ने मालती को राकेश की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
बताया गया कि शरीर के अंग भी तबतक काम करेंगे, जब तक उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें बताया गया कि अंगदान से उनके पति अमर हो जाएंगे। उनके पति के अंगों से पांच लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है।