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Lucknow News: एम्स में महिला की मौत, भड़के परिजन
Thu, 13 Jun 2024 03:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 13 Jun 2024 03:08 AM IST
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की इमरजेंसी में बुधवार को महिला के इलाज में लापरवाही की हद पार हो गई। आरोप है कि करीब साढ़े तीन घंटे तक तड़पने के बाद भी मरीज को किसी ने देखा तक नहीं, इलाज के अभाव में महिला ने दम तोड़ दिया। गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया। पति ने भदोखर थाने में तहरीर देकर मरीज की मौत के बाद इलाज शुरू करने का गंभीर आरोप लगाया। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की टीम व स्टाफ पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।
शहर कोतवाली क्षेत्र के विकास नगर पुलिस लाइन चौराहा निवासी अरुण कुमार वर्मा बुधवार की सुबह करीब सात बजे अपनी पत्नी किरन वर्मा को गंभीर हालत में एम्स की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इससे पहले मरीज को सुबह जिला अस्पताल ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे एम्स रेफर कर दिया गया था। महिला के सिर में दर्द के साथ ही उल्टियां हो रहीं थी।
परिजनों का आरोप है कि साढ़े 10 बजे तक बार-बार गिड़गिड़ाने के बाद भी कोई भी डॉक्टर व स्टाफ मरीज को देखने के लिए नहीं आया। पति अरुण का आरोप है कि पत्नी की सांसें चल रहीं थी। 10.30 बजे पत्नी की सांसें थम गई। घर के लोग रोने बिलखने लगे तो आननफानन में मरीज को वार्ड में शिफ्ट करके इलाज शुरू किया गया। अपरान्ह करीब 12 बजे मौत होने की सूचना दी।
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पीडि़त ने एम्स के इमरजेंसी वार्ड में सुबह सात से 12 बजे तक तैनात डॉक्टरों व अन्य स्टॉफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। आरोप लगाया कि समय से इलाज शुरू कर दिया गया होता तो किरन की जान बच जाती। भदोखर एसओ शिवकांत पांडेय ने बताया कि एम्स के इमरजेंसी के डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ तहरीर मिली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
मौत के बाद इलाज शुरू होता तो न हो पाता सीटी स्कैन : डॉ. सुयश
एम्स के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुयश सिंह ने किरन वर्मा की मौत के मामले आरोपों का खंडन किया। बताया यदि मरीज की मौत के बाद उसका इलाज शुरू किया गया होता तो सीटी स्कैन की जांच नहीं हो सकती थी। मरीज को भर्ती करके सीटी स्कैन किया गया, जिसमें दिमागी बुखार होने की पुष्टि हुई। अन्य जांच रिपोर्ट में भी सिर में सूजन मिली। मरीज को बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के विकास नगर पुलिस लाइन चौराहा निवासी अरुण कुमार वर्मा बुधवार की सुबह करीब सात बजे अपनी पत्नी किरन वर्मा को गंभीर हालत में एम्स की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इससे पहले मरीज को सुबह जिला अस्पताल ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे एम्स रेफर कर दिया गया था। महिला के सिर में दर्द के साथ ही उल्टियां हो रहीं थी।
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परिजनों का आरोप है कि साढ़े 10 बजे तक बार-बार गिड़गिड़ाने के बाद भी कोई भी डॉक्टर व स्टाफ मरीज को देखने के लिए नहीं आया। पति अरुण का आरोप है कि पत्नी की सांसें चल रहीं थी। 10.30 बजे पत्नी की सांसें थम गई। घर के लोग रोने बिलखने लगे तो आननफानन में मरीज को वार्ड में शिफ्ट करके इलाज शुरू किया गया। अपरान्ह करीब 12 बजे मौत होने की सूचना दी।
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पीडि़त ने एम्स के इमरजेंसी वार्ड में सुबह सात से 12 बजे तक तैनात डॉक्टरों व अन्य स्टॉफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। आरोप लगाया कि समय से इलाज शुरू कर दिया गया होता तो किरन की जान बच जाती। भदोखर एसओ शिवकांत पांडेय ने बताया कि एम्स के इमरजेंसी के डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ तहरीर मिली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
मौत के बाद इलाज शुरू होता तो न हो पाता सीटी स्कैन : डॉ. सुयश
एम्स के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुयश सिंह ने किरन वर्मा की मौत के मामले आरोपों का खंडन किया। बताया यदि मरीज की मौत के बाद उसका इलाज शुरू किया गया होता तो सीटी स्कैन की जांच नहीं हो सकती थी। मरीज को भर्ती करके सीटी स्कैन किया गया, जिसमें दिमागी बुखार होने की पुष्टि हुई। अन्य जांच रिपोर्ट में भी सिर में सूजन मिली। मरीज को बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।