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तू भी खुश और वो भी खुश
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 21 Jan 2014 02:11 PM IST
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कई कर्मचारी संगठन एक ही मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए थे।
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सरकार भी कई बार मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन दे चुकी थी, मगर सरकार पर दोनों ही पक्षों का दबाव कि फैसला उनके साथ होने वाली बैठक से जोड़ा जाए जिससे अफसर पसोपेश में थे।
आखिरकार अफसरों ने बड़ी चतुराई से रास्ता निकाल लिया। एक ही व्यवस्था के लिए एक संगठन की बैठक में नियमावली को लेकर सहमति बना ली तो दूसरी में कैबिनेट से संस्तुति कराकर जीओ जारी कराने की।
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नियुक्ति के बाद परिवीक्षा और पदोन्नति से जुड़ी विसंगतियां दूर करने की मांगें इसकी बानगी हैं। एक गुट की मांग को लेकर सरकार ने पहले नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई।
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कुछ दिन बाद वैसे ही प्रस्ताव पर कैबिनेट से मुहर लगवा दी। अब दोनों ही संगठन खुश हैं। अपने-अपने लोगों को बता रहे हैं कि आदेश उनके प्रयास से हुए हैं।
अफसर भी खुश कि दोनों संतुष्ट हो गए। मगर इस पूरी कवायद का एक संदेश यह है कि आगे चलकर नियमावली व जीओ की श्रेष्ठता को लेकर किचकिच शुरू हो सकती है।