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जानिए, यूपी में क्यों फेल होते हैं अफसर
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 17 Jan 2014 02:08 PM IST
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राममोहन की हत्या के डेढ़ माह बाद अंबेडकरनगर का टांडा फिर तनाव की गिरफ्त में है। मामूली लेनदेन के विवाद में दो पक्षों में टकराव ने सांप्रदायिक तनाव की नौबत खड़ी कर दी।
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साल भर में बहराइच और टांडा के हालात बार-बार बारूदी होने के पीछे पुलिस, स्थानीय सरकारी मशीनरी और अफसरों की असावधानी साफ नजर आती है। इन घटनाओं को थोड़ी सी एहतियात और सक्रियता से टाला जा सकता था।
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एक-डेढ़ साल में बहराइच में कहीं न कहीं तनाव के हालात के मद्देनजर अधिकारियों से इस बार बारावफात पर ज्यादा सावधानी और सक्रियता की उम्मीद थी।
पर, उन्होंने उस इलाके में जुलूस के साथ दो सिपाही तैनात करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जो कई दफा हिंसा और तनाव की चपेट में आ चुका है।
संदेशों की खेती करने की तर्ज पर अफसरों ने यह जानना भी मुनासिब नहीं समझा कि उनके आदेशों पर अमल हो भी रहा है या नहीं।
पल्ला झाड़ने की कोशिश
जब घटना घट गई तो पुलिस अधीक्षक मोहित गुप्ता ने कहा कि उन्होंने क्षेत्राधिकारी को सुरक्षा-व्यवस्था का निर्देश दिया था।
क्षेत्राधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने उस दर्जी पुरवा और शंकर का पुरवा चौराहे पर पर्याप्त सुरक्षा बंदोबस्त कर रखे थे, जहां इसके पहले कजली तीज पर सांप्रदायिक तनाव फैला था।
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रामबाबू गुप्ता की हत्या के बाद जिस तरह बवाल और तनाव हुआ था, उससे उम्मीद थी कि अधिकारी सबक लेंगे। पर, अधिकारी नहीं चेते और नतीजतन 10 महीने के भीतर रामबाबू के भतीजे राममोहन की हत्या हो गई।