अखिलेश राज में हर सात दिनों में यूपी में हुए दो दंगे, श्वेत पत्र में योगी का दावा
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श्वेत पत्र में बताया गया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बदहाल थी। अराजक तत्व निरंकुश थे। सार्वजनिक व निजी भूमि पर जबरन कब्जा करने वाले अपराधियों व भू-माफिया का बोलबाला था। मथुरा के जवाहरबाग की घटना ध्वस्त कानून-व्यवस्था की बानगी है। थानों में एफआईआर में भेदभाव होता था। आरक्षियों व उपनिरीक्षकों के डेढ़ लाख पद खाली थे। पिछली सरकार में हर सप्ताह औसतन दो दंगे हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के लोकभवन में यूपी के पिछले 15 वर्षों के शासन काल पर श्वेत पत्र जारी किया और बताया कि किस हाल में यूपी उन्हें मिला।
श्वेत पत्र के अनुसार, खनन में माफियाराज, 477.93 करोड़ की चपत: खनन क्षेत्र में माफियाराज की चर्चा करते हुए कहा गया है कि इससे बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व की हानि हो रही थी। इसी वजह से कोर्ट को बालू, मोरंग के खनन पर रोक लगा कर सीबीआई जांच का आदेश देना पड़ा।
सीएजी रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पांच पट्टाधारकों और 2909 ईंट भट्ठा मालिकों को बिना पर्यावरण मंजूरी के खनन की अनुमति दे दी गई। 30 पट्टाधारकों को पर्यावरण मंजूरी में अनुमोदित मात्रा से अधिक खनिजों केखनन की मंजूरी दी गई। 40 पट्टाधारकों ने 191.77 एकड़ में पौधरोपण नहीं किया। इसकेलिए इनसे 179.57 करोड़ वसूलने थे, लेकिन नहीं वसूले गए। सरकार को विभिन्न स्तर पर 477.93 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ।
50 लाख अपात्रों को दे रहे थे सरकारी राशन
श्वेत-पत्र के अनुसार,पिछली सरकारों ने गरीबों का राशन गरीबों तक न पहुंचाकर बाजार में बेच दिया। मनमाने ढंग से सरकारी कोटे निरस्त, संबद्ध और बहाल किए गए। 50 लाख फर्जी राशन कार्ड जारी करने की आशंका है। अब तक पात्र गृहस्थी के 2620777 तथा अंत्योदय के 98089 राशन कार्ड अपात्र पाए गए हैं। इनके स्थान पर पात्र परिवारों का चयन किया जा रहा है। इन अनियमितताओं की सीबीआई जांच चल रही है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा धन-उगाही के दुधारू गाय
पिछली सरकारों की खराब व भ्रष्ट नीतियों से नोएडा, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र धन उगाही के दुधारू गाय होकर रह गए। फ्लैट बिल्डर्स -बायर्स विवाद अत्यंत विकट हो गया। सत्ता के संरक्षण में बिल्डर्स की अवैध गतिविधियां चलती रहीं। तीन लाख खरीदारों को कई वर्षों बाद भी मकान पर कब्जे नहीं मिल पाए। पिकप व यूपीएफसी बीमार इकाइयों में बदल गईं। खराब-कानून-व्यवस्था से अपेक्षित निवेश भी नहीं हुआ।
कागज पर बनाते रहे सड़कें
- सरकार में आने पर पता चला कि एक लाख 21 हजार 36 किलोमीटर सड़कों में गड्ढे थे।
- पर्याप्त बजट न होने पर भी 59 सड़कें 1000 रुपये की टोकन मनी से शुरू की गईं।
- त्वरित आर्थिक विकास योजना में 230 कार्य अपूर्ण रह गए हैं। इसे पूरा कराने के लिए 1385 करोड़ रुपये चाहिए।
- सड़क निर्माण में आपराधिक छवि के ठेकेदारों का वर्चस्व बन गया था।
- दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग का निर्माण पीपीपी पर होना था। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।
- 3071.45 करोड़ के 96 कार्यों के टेंडर शासन के अनुमोदन व वित्तीय स्वीकृति के बिना ही आमंत्रित कर लिए गए। इसी तरह 4184.74 करोड़ के 156 कार्यों के टेंडर नोटिस तकनीकी स्वीकृति के बिना ही जारी किए गए।
- बड़ी संख्या में ठेकेदार पंजीकृत थे लेकिन 2011-16 के बीच 3300.79 करोड़ लागत के 5988 अनुबंध एक या दो निविदाओं के आधार पर किए गए।
मायावती सरकार पर वार
- चीनी निगम की 10 और राज्य चीनी एवं गन्ना विकास लिमिटेड की 11 बंद मिलों को बेच दिया गया। इसमें घोर अनियमितता बरती गई।
- चार मिलों के भूमि मूल्यांकन में 90 करोड़ की कमी दिखाई गई। पूर्व मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा दिए गए औसत बाजार मूल्य की तुलना में भूमि के औसत बाजार मूल्य में 128.41 करोड़ की कमी की गई।
- सलाहकार द्वारा बताए गए मूल्य की तुलना में प्लांट व मशीनरी का कम स्क्रैप मूल्य पर मूल्यांकन के कारण अनुमानित मूल्य में 43.20 करोड़ की कमी हो गई।
- मिलों को बेचने की प्रक्रिया में बिडर्स की साठगांठ के कारण चीनी निगम की तीन मिलों के लिए अनुमानित 291.55 करोड़ के विरुद्ध केवल 165.85 करोड़ मिले।
- चीनी व गन्ना विकास निगम की 11 मिलों के मामले में अनुमानित मूल्य 173.63 करोड़ के विरुद्ध 91.65 करोड़ ही मिले।
- चीनी मिलों की बिक्री मामले की सीबीआई जांच की घोषणा पर सीधा जवाब न देते हुए योगी ने कहा, सीएजी की रिपोर्ट सदन में आएगी और पीएसी में चर्चा होगी।