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'चीफ' के मारे ये बेचारे
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 20 Jul 2013 12:58 PM IST
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शासन के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी अभी तक तो केवल ‘चीफ’ की बैठकों को लेकर ही परेशान थे लेकिन, अब उनके व्यवहार को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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खुद की फैमिली यहां है नहीं, इसलिए दूसरों की फैमिली का दर्द भी नहीं समझते हैं। ज्यादा सोशल भी नहीं हैं। इसलिए समय बिताने के लिए वीकेंड में अहम बैठकें बुलाने लगे हैं।
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पहले तो अधिकारी समझे थे कि, एकाध हफ्ते का मामला है लेकिन, अब यह हर हफ्ते का बवाल बन गया है। अफसरों का रोना है कि, परिवार के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है।
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ऊपर से गाहे-बगाहे उनका बर्ताव पिछली सरकार के ‘पायलट’ की याद दिला देता है। फर्क इतना है कि, ‘पायलट’ कॉडर के नहीं थे, इसलिए उस समय कॉडर के लोगों से कहकर मन हल्का कर लेते थे।
यहां तो मामला अपने ही कॉडर का है। पता नहीं कौन ‘गुडबुक’ में शामिल होने के चक्कर में ‘चीफ’ तक बात पहुंचा दे और लेने के देने पड़ जाएं।