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Lucknow News: जहां गूंजती थी साहित्य की स्वर लहरियां, वहां अब सन्नाटा

Sat, 06 Sep 2025 02:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Sep 2025 02:38 AM IST
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Where the sounds of literature used to reverberate, there is now silence
बदहाल पड़ा  हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह।
लखनऊ। राजधानी में साहित्यिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह पिछले तीन साल से ताले में जकड़ा है। नवीनीकरण और अनुरक्षण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रही कार्यदायी संस्था की लापरवाही के चलते यह अब तक संस्थान को हैंडओवर नहीं हो सका।
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राजकीय निर्माण निगम को संस्थान के सभागारों और मुक्ताकाश मंच के नवीनीकरण का जिम्मा दिया गया था। इसके लिए 485.77 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, जबकि जीएसटी समेत कुल लागत 517.70 लाख तय हुई। इस राशि से प्रेमचंद और निराला सभागार का काम पूरा कर संस्थान को सौंप दिया गया, लेकिन सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण यशपाल प्रेक्षागृह तकनीकी कमियों के कारण अधर में अटका हुआ है।
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संस्थान सूत्रों के मुताबिक, काम लगभग पूरा हो चुका है, परंतु हॉल के भीतर और बाहर बरसात में पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। इस कारण यह तीन साल से बंद है। हिंदी प्रेमियों का कहना है कि राजधानी का बेहतरीन सभागार लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। संस्थान में लंबे समय से कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई और पूर्णकालिक निदेशक के अभाव में भी काम की रफ्तार ठप है।
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Iएक बड़ा प्रेक्षागृह हिंदी संस्थान के पास है। इसकी बदहाली के लिए कार्यदायी संस्था जिम्मेदार है या प्रशासन, यह जांच का विषय है। इसे जल्द उपयोग योग्य बनाया जाए।I
I- सूर्य कुमार पांडेय, वरिष्ठ व्यंग्यकार व बाल साहित्यकारI
Iयशपाल सभागार में मुझे दो बार हिंदी संस्थान से पुरस्कार मिला। यहां देश के बड़े लेखकों-कवियों को सुना। इसकी दुर्दशा देखकर मन दुखी है। सरकार जल्द कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करे।I

I- पंकज प्रसून, हास्य कवि-व्यंग्यकारI
Iयशपाल सभागार में राष्ट्रीय स्तर के आयोजन होते रहे हैं। तीन साल से बंद है, इसमें कार्यदायी संस्था और संस्थान प्रशासन दोनों की घोर लापरवाही है। डर है, नवीनीकरण के बाद किराया भी बढ़ जाएगा।I
I- राजेंद्र शुक्ल राज, साहित्यकारI
Iहिंदी के उत्थान के लिए बने संस्थान में हिंदी आयोजनों की ही उपेक्षा हो रही है। सरकार को चाहिए कि सभागार निशुल्क या न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराए जाएं।I
I- कुलदीप कलश, कविI
Iअभी तक मुझे इस मामले की जानकारी नहीं थी। विशेष सचिव से जांच कराकर जल्द कार्रवाई की जाएगी, ताकि सभागार आयोजनों के लिए उपलब्ध हो सके।I
I- आलोक कुमार तृतीय (आईएएस), निदेशक, हिंदी संस्थानI

बदहाल पड़ा  हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह।

बदहाल पड़ा  हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह।

बदहाल पड़ा  हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह।

बदहाल पड़ा  हिंदी संस्थान का यशपाल प्रेक्षागृह।

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