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बाकी तो खुशनुमा पर इन '2 मामलों' में तीखे रहे अखिलेश-नाईक के संबंध

Tue, 25 Aug 2015 01:46 PM IST
Updated Tue, 25 Aug 2015 01:46 PM IST
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when governor ram naik and cm akhilesh came face to face

यूपी के राज्यपाल राम नाईक से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच संबंध कैसे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब मुख्यमंत्री विदेश यात्रा से लौटकर आते हैं तो वह राज्यपाल को सेंट की बोतल भेंट करते हैं। मसला यहीं तक नहीं है सपा सुप्रीमो राजभवन पहुंचते हैं और राज्यपाल को अपना सालों पुराना साथी बताते हैं।

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राज्यपाल और आजम खां के बीच जुबानी और पत्रों के बीच जो भी चलता रहे अखिलेश ने इस मसले पर कभी भी खुलकर कोई बयान नहीं दिया। कोशिश हमेशा यही रही कि 'आपस के संबंध' अच्छे बने रहें।
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लेकिन दो ऐसे मसले हैं जब राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के बीच के संबंध बेहद तल्ख हो जाते हैं। पहला मसला सरकार के मनचाहे एमएलसी की नियुक्ति का है और दूसरा मसला लोकायुक्त का। इन दोनों ही मामलों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री एक-दूसरे की बात को काटने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का भरपूर इस्तेमाल करते हैं।
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राज्य सरकार जिन चेहरों को विधान परिषद भेजना चाहती है उन पर ज्यादातर में राज्यपाल को ऐतराज है। सरकार द्वारा एमएलसी के लिए भेजे गए 9 नामों में से राज्यपाल ने सिर्फ चार पर सहमति दी है। एसआरएस यादव, लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष यादव और जीतेंद्र यादव के अलावा जो पांच और नाम हैं उन पर राजभवन को गहरी आपत्ति है।

राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि कमलेश कुमार पाठक, संजय सेठ, रणविजय सिंह, अब्दुल सरफराज खां और राजपाल कश्यप कश्यप के बैकग्राउंड के पड़ताल के बाद ही इन नामों पर वह स्वीकृति देंगे। जबकि सरकार इनको विधान परिषद भेजने का मन बना चुकी है। राज भवन से अब तक इन नामों पर सहमति नहीं लगाई गई है।

चार बार लौटा चुके हैं लोकायुक्त की फाइल

when governor ram naik and cm akhilesh came face to face

ताजा मामला उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति का है। राज्यपाल ने मंगलवार को चौथी बार लोकायुक्त नियुक्ति की फाइल सरकार को बैरंग लौटा दी है।

पिछले 20 दिनों के अंदर गवर्नर ने राज्य सरकार को चौथी बार लोकायुक्त नियुक्ति की फाइल वापस कर दी है। एक ओर जहां सरकार जस्टिस रविन्द्र सिंह यादव को लोकायुक्त नियुक्त करने पर अड़ गई है।

वहीं दूसरी तरफ राज्यपाल का कहना है कि सरकार लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सही कानूनी प्रक्रिया नहीं अपना रही है। लोकायुक्त को लेकर दोनों पक्षों के मतभेद की वजह से लोकायुक्त की नियु‌क्ति का मामला टलता जा रहा है।

इससे पहले 21 अगस्त को राज्यपाल राम नाइक ने तीसरी बार लोकायुक्त फाइल वापस करने के बाद कहा था कि सीएम, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और विधानसभा के नेता विरोधी दल की राय में एकरुपता ना होने की वजह से वह बार-बार फाइल वापस कर रहे हैं।

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