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एक ही गाड़ी में मिले 90 कैदी, डीजीपी ने इस तरकीब से जानी पुलिस सुरक्षा असलियत

Wed, 21 Aug 2019 10:36 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 21 Aug 2019 10:36 AM IST
सार

  • डीजीपी के रियलिटी चेक में खुली पेशी के दौरान कैदियों की सुरक्षा की पोल
  • कहीं कैदी वाहन में नहीं मिले सुरक्षा कर्मी, तो कहीं रिवॉल्वर में मैगजीन नहीं

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when 90 prisoners found in one vehicle, this is how dgp up get to know about police security
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगता है जिलों की पुलिस ने पिछले महीने संभल में दो सिपाहियों की हत्या कर कैदियों के फरार होने की घटना से कोई सबक नहीं लिया। बाराबंकी में कैदी वाहन में कैदियों को ठूंसकर भरा गया था। एक गाड़ी में कुल 90 कैदी सवार थे।
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गाड़ी में जगह न होने की वजह से कैदियों की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों को निजी वाहनों से जेल से अदालत तक आना पड़ा। अदालत में बनी लॉकअप भी काफी जर्जर हालत में थी, जिसका दरवाजा एक धक्के में खोला जा सकता था।
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डीजीपी ओमप्रकाश सिंह के निर्देश पर जब मुल्जिम ड्यूटी और मुल्जिमों को ले जाने वाली गाड़ियां चेक की गईं तो चौंकाने वाली यह हकीकत सामने आई। शनिवार को सभी जिलों में दो-दो पुलिस उपाधीक्षकों ने कैदी वाहनों और ड्यूटी की आकस्मिक चेकिंग की। इस दौरान 25 से अधिक जिलों में खामियां मिलीं। 
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कहीं सुरक्षा में लगाए गए पुलिस कर्मी गायब थे तो कहीं पुलिस कर्मी की पिस्टल में कारतूस ही नहीं था। किसी गाड़ी का दरवाजा टूटा हुआ था तो कोई गाड़ी बिना बाहर से लॉक किए ही जेल से अदालत का सफर तय कर रही थी। संभल में ही कैदियों की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी की पिस्टल में मैगजीन तो थी लेकिन उसमें एक भी कारतूस नहीं था। 

मुरादाबाद में कैदियों की सुरक्षा में लगाए गए तीन पुलिसकर्मी ड्यूटी से गायब मिले। इसके अलावा कई जिलों में कैदियों को लाने-ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस नहीं मिला। कई गाड़ियों का दरवाजा काफी जर्जर था। कुछ में तो बाहर से ताला भी नहीं बंद किया गया था। इन खामियों के बाद कई जिलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

संभल की घटना से नहीं लिया सबक

पिछले महीने संभल में कैदियों की सुरक्षा में तैनात दो पुलिस कर्मियों की हत्या कर तीन कैदी फरार हो गए थे। इसके बाद डीजीपी ने कैदियों की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे।

सभी एडीजी जोन, आईजी रेंज, डीआईजी रेंज, एटीएस, एसटीएफ और रेलवे के शीर्ष अधिकारियों को कहा गया था कि जघन्य अपराध के अभियुक्तों एवं शातिर अपराधियों जिनके भागने की आशंका हो, उनके परिचालन में विशेष सतर्कता बरती जाए।

ऐसे मुल्जिमों को न्यायालय से निर्देश लेकर हथकड़ी लगाकर ले जाया जाए और इनकी ड्यूटी में पुलिस बल की संख्या बढ़ाई जाए। शातिर और कुख्यात बंदियों के आवागमन के लिए जीपीएस युक्त वाहन का प्रयोग किया जाए और वाहन की लोकेशन समय-समय पर चेक की जाए। जिस गाड़ी से बंदी को पेशी पर ले जा रहे हों, उसमें सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।
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