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Lucknow News: चीनी एप से तीन दिन में थम गए 1250 ई रिक्शों के पहिये

Sun, 05 Jul 2026 02:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 02:02 AM IST
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Wheels of 1,250 e-rickshaws ground to a halt in three days due to a Chinese app.
ई रिक्शा चालक वासुदेव।
लखनऊ। वासुदेव एयरपोर्ट से आलमबाग रूट पर ई रिक्शा (नंबर यूपी 32 आरटी 5946) चलाते हैं। बीते शुक्रवार को उन्होंने एयरपोर्ट चाैराहे से यात्रियों को ई रिक्शे पर बिठाया। कुछ दूर जाने पर ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने रिक्शे को स्टार्ट करने के खूब प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हुए। वह ई रिक्शे को खींचकर ट्रांसपोर्टनगर में यात्री ई रिक्शा शोरूम तक ले गए, जहां इंजीनियर ने उसे ठीक किया।
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दरअसल, उनके ई रिक्शे को किसी शरारती तत्व ने चीनी एप की मदद से बंद कर दिया था। पिछले तीन दिनों में राजधानी के 1250 ई रिक्शों के पहिये इसी तरह बीच रास्ते थामे जा चुके हैं। वासुदेव की तरह रोजाना सैकड़ों ई रिक्शा संचालक चीनी एप से परेशान हो रहे हैं। इंजीनियर जय हिंद गुप्ता ने बताया कि बैट बीएमएस, लाॅसिजी, इपोच ली आयन जैसे चीनी एप सिंगल बैटरी वाले ई रिक्शे को बंद करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। फिलहाल केंद्र सरकार ने ये एप बंद कर दिए हैं।
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वहीं, ई-चालक कल्याण समिति के अध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि ई रिक्शा संचालकों के लिए चीनी एप से मुश्किलें बढ़ गई हैं। डीएम से रविवार को मुलाकात कर इस बाबत ज्ञापन साैंपा जाएगा। मयंक ने बताया कि कंपनियों व उनके पास मिलाकर तीन दिनों में बीच रास्ते ई रिक्शे बंद हाेने की 1250 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं।
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ऐसे ई रिक्शे बीच रास्ते हो रहे बंद
इंजीनियर बताते हैं कि लिथियम आयन वाली सिंगल बैटरी ही सर्वाधिक प्रभावित हो रही है। दरअसल, सुरक्षा के उद्देश्य से बैटरी में ब्लूटूथ डिवाइस लगाई जाती है। इनका एक्सेस कंपनी के पास रहता था, लेकिन चीनी एप आने से अब बैटरी को कोई भी ऑपरेट कर लेता है। ऐसे में पीड़ित के आने पर एप के जरिये ही ई रिक्शा दोबारा स्टार्ट किया जा रहा है।


तीन किमी खींचा ई-रिक्शा, फूल गईं सांसें
हीरा आलमबाग रूट पर ई रिक्शा (यूपी 32 आरएन 3268) चलाते हैं। शनिवार को उनका रिक्शा भी अचानक रुक गया। हीरा ने बताया कि तीन किमी तक उन्हें ई रिक्शा खींचना पड़ा, उनकी सांसें फूल गईं। ऐसे ही संदीप का ई रिक्शा (यूपी 32 जेडएन 2458) जब बंद हुआ तो उन्होंने मैकेनिक को बुलाया। मैकेनिक भी समस्या नहीं पकड़ पाया। फिर इंजीनियर की मदद से ई रिक्शा ठीक हुआ। दिहाड़ी तीन साै कमाई और मैकेनिक इंजीनियर पर पांच साै रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा।
फैक्ट
-1.50 लाख से अधिक ई रिक्शे हैं राजधानी में
-25 हजार से अधिक सिंगल बैटरी वाले ई रिक्शे हैं
-400 शिकायतें औसतन प्रतिदिन आ रहीं
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