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गेहूं खरीद के आंकड़े छू रहे आसमान, केंद्रों पर किसान परेशान
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सीतापुर। मेहनत कर पहले गेहूं की फसल तैयार की। अब सरकारी क्रय केंद्रों पर इसे बेचने के लिए उन्हें जंग लड़नी पड़ रही है। पंजीकरण कराने के महीनों गुजर जाने के बाद भी तौल नहीं हो पा रही है। कई-कई दिनों से फसल को लेकर अन्नदाता केंद्रों पर दिन-रात गुजार रहे हैं। अफसरों से लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन नतीजा जस का तस है। मंगलवार को इसी समस्या पर अमर उजाला ने शहर के गल्ला मंडी से लेकर लहरपुर, महमूदाबाद, तंबौर के क्रय केंद्रों का हाल जाना तो किसानों का दर्द गुबार बनकर सामने आ गया। सच तो ये है कि किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है, जबकि सरकारी कागजों में गेहूं खरीद के आंकड़े आसमान छू रहे हैं। पहली अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद 12 लाख 33 हजार 443 क्विंटल को पार गई है। केंद्र प्रभारियों पर धन उगाही और दलालों को गेहूं तौले जाने के आरोप लग रहे हैं। जिम्मेदार आरोपों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में तौल के आंकड़े आसमान कैसे छू रहे हैं, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले में पहली अप्रैल से 6 एजेंसियों के 161 क्रय केंद्रों पर गेहूं की तौल शुरू हुई थी। शुरुआत में तौल धीमी रही, लेकिन समय के साथ बढ़ोत्तरी होती चली गई। खरीद के आंकड़ा छलांग मारने लगा। साथ ही किसानों के भी परेशानी का दौर शुरू हो गया। कहीं बोरों की कमी और कहीं उठान की समस्या का हवाला देते हुए किसानों को केंद्रों से वापस किया जाने लगा। तौल का आंकड़ों में किसी तरह की कमी नहीं आई।
तौल बढ़ती ही चली गई। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो मंगलवार तक जिले में 12 लाख 33 हजार 443 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। विभागीय कागजों पर सरपट दौड़ी खरीद पर लोगों को यकीन नहीं हो रहा है। धूप में केंद्रों तौल के इंतजार में केंद्रों पर खड़े किसान की हालत और पिछली घटनाएं विभागीय आंकड़ों पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
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दलालों का गेहूं तौले जाने का आरोप लगाया
पिछले दिनों सांडा के एफसीआई केंद्र पर किसानों ने दलालों का गेहूं तौले का जाने का आरोप लगाया था। ऐसा ही एक मामला नैमिषारण्य के ठाकुरनगर स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर हुआ था। जिले के लहरपुर और रामपुर मथुरा, जहांगीराबाद में गेहूं खरीद नहीं होने का मामला पहले ही सामने आ चुके हैं। पोल-पट्टी खुलने में केंद्र पर कार्य रहे एक व्यक्ति को रोजगार से हाथ धोना पड़ गया था। लेकिन गेहूं क्रय केंद्रों पर किसी तरह का सुधार नहीं आया है। वर्तमान में किसानों को बोरों की अनुउपलब्धता और उठान के संकट का हवाला देकर तौल के इंतजार कराया जा रहा है। लंबे इंतजार से आजिज आकर किसान खुली मंडी में औने-पौने दामों पर गेहूं बेच रहे हैं।
शहर की गल्ला मंडी के केंद्रों पर इस समस्या से जूझ रहे किसानों ने दर्द बयां किया। आरएफसी के क्रय केंद्र पर तौल के लिए खड़े किसानों ने कहा कि बोरों की कमी के चलते इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह आ गए थे, दोपहर हो गई है, केंद्र प्रभारी से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। शाम तक तौल नहीं हुई तो मजबूरन खुली मंडी में गेहूं बेचना पड़ेगा।
फुल हो गए केंद्रों के प्लेटफार्म
जिले की गेहूं खरीद में पग-पग पर अव्यवस्थाएं हैं। सरकारी मशीनरी के पास न तो तौल के लिए पर्याप्त बोरे हैं और न ही गेहूं स्टोरेज की जगह। ऐसे में खरीद केंद्रों के प्लेटफार्म पूरी तरह से फुल हो गए हैं। शहर की गल्ला मंडी का एक भी क्रय केंद्र का प्लेटफार्म खाली नहीं रह गया है। खाद्य एवं विपणन शाखा के केंद्र का हजारों क्विंटल गेहूं खुले में लगा है। बारिश से बचाने के लिए चट्टे पर पॉलिथीन लगा दी गई है। केंद्र प्रभारी अभिषेक मिश्र ने बताया कि मंडी के पीछे बने प्लेटफार्म को खाली काराकर केंद्रों का गेहूं स्टोर किया जाएगा। इससे तौल करने में सहूलियत हो जाएगी।
खाली बोरे नहीं, गेहूं कहां ले जाएं...
पीसीएफ के गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी ललित ने बताया कि 5000 क्विंटल गेहूं का लक्ष्य था। जिसके सापेक्ष में ढाई हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। सहकारी संघ के सचिव राजेश ने बताया कि संघ का गोदाम भरा पड़ा है। गेहूं लगाने की जगह नहीं है। खाली बोरे भी नहीं है। तौल कर गेहूं कहां लगाएं।
आठ ट्रॉली तौल के इंतजार में खड़ी
लहरपुर स्थानीय मंडी समिति स्थित खाद एवं रसद विभाग की ओर संचालित गेहूं क्रय केंद्र का प्रभारी का स्थानांतरण होने के बाद तौल ठप है, और किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अभी भी सात आठ ट्रॉली गेहूं से भरी मंडी में तौल का इंतजार कर रही हैं।
मंगलवार दोपहर तक किसी भी केंद्र पर नहीं हुई तौल
तंबौर (सीतापुर)। कस्बे की मंडी परिसर में चल रहे छह से अधिक गेहूं केंद्रों पर मंगलवार को दोपहर तक कोई तौल नहीं हुई। वजह, बोरों का अभाव बताया गया। किसी भी केन्द्र पर उनसे संबंधित तीन को छोड़कर कोई प्रभारी मौजूद नहीं मिला। कुछ से फोन कर उनके केंद्रों की खरीद, उठान व भुगतान की जानकारी मिल सकी।
कई केंद्रों के किसानों का करोड़ों में भुगतान भी लंबित है। मंडी परिसर में पीसी एफ, कृषि उत्पादन, साधन सहकारी समितियों, पीसीयू ,खाद्य व रसद संभाग के करीब 10 गेहूं खरीद केन्द्र संचालित है। कई केन्द्रों पर आज तक बैनर नहीं टांगे गए। साधन सहकारी समिति बसंतापुर के केंद्र प्रभारी पवन मिश्र ने बताया कि कई दिनों से मांग के बावजूद बोरे न मिलने से खरीद बाधित है। किसानों को 29 मई तक खरीद का भुगतान हो चुका है। एक केन्द्र पर शेड के नीचे काफी स्थान होने के बावजूद गेहूं का काफी स्टाक बाहर लगा था।
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जिले में पहली अप्रैल से 6 एजेंसियों के 161 क्रय केंद्रों पर गेहूं की तौल शुरू हुई थी। शुरुआत में तौल धीमी रही, लेकिन समय के साथ बढ़ोत्तरी होती चली गई। खरीद के आंकड़ा छलांग मारने लगा। साथ ही किसानों के भी परेशानी का दौर शुरू हो गया। कहीं बोरों की कमी और कहीं उठान की समस्या का हवाला देते हुए किसानों को केंद्रों से वापस किया जाने लगा। तौल का आंकड़ों में किसी तरह की कमी नहीं आई।
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तौल बढ़ती ही चली गई। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो मंगलवार तक जिले में 12 लाख 33 हजार 443 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। विभागीय कागजों पर सरपट दौड़ी खरीद पर लोगों को यकीन नहीं हो रहा है। धूप में केंद्रों तौल के इंतजार में केंद्रों पर खड़े किसान की हालत और पिछली घटनाएं विभागीय आंकड़ों पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
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दलालों का गेहूं तौले जाने का आरोप लगाया
पिछले दिनों सांडा के एफसीआई केंद्र पर किसानों ने दलालों का गेहूं तौले का जाने का आरोप लगाया था। ऐसा ही एक मामला नैमिषारण्य के ठाकुरनगर स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर हुआ था। जिले के लहरपुर और रामपुर मथुरा, जहांगीराबाद में गेहूं खरीद नहीं होने का मामला पहले ही सामने आ चुके हैं। पोल-पट्टी खुलने में केंद्र पर कार्य रहे एक व्यक्ति को रोजगार से हाथ धोना पड़ गया था। लेकिन गेहूं क्रय केंद्रों पर किसी तरह का सुधार नहीं आया है। वर्तमान में किसानों को बोरों की अनुउपलब्धता और उठान के संकट का हवाला देकर तौल के इंतजार कराया जा रहा है। लंबे इंतजार से आजिज आकर किसान खुली मंडी में औने-पौने दामों पर गेहूं बेच रहे हैं।
शहर की गल्ला मंडी के केंद्रों पर इस समस्या से जूझ रहे किसानों ने दर्द बयां किया। आरएफसी के क्रय केंद्र पर तौल के लिए खड़े किसानों ने कहा कि बोरों की कमी के चलते इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह आ गए थे, दोपहर हो गई है, केंद्र प्रभारी से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। शाम तक तौल नहीं हुई तो मजबूरन खुली मंडी में गेहूं बेचना पड़ेगा।
फुल हो गए केंद्रों के प्लेटफार्म
जिले की गेहूं खरीद में पग-पग पर अव्यवस्थाएं हैं। सरकारी मशीनरी के पास न तो तौल के लिए पर्याप्त बोरे हैं और न ही गेहूं स्टोरेज की जगह। ऐसे में खरीद केंद्रों के प्लेटफार्म पूरी तरह से फुल हो गए हैं। शहर की गल्ला मंडी का एक भी क्रय केंद्र का प्लेटफार्म खाली नहीं रह गया है। खाद्य एवं विपणन शाखा के केंद्र का हजारों क्विंटल गेहूं खुले में लगा है। बारिश से बचाने के लिए चट्टे पर पॉलिथीन लगा दी गई है। केंद्र प्रभारी अभिषेक मिश्र ने बताया कि मंडी के पीछे बने प्लेटफार्म को खाली काराकर केंद्रों का गेहूं स्टोर किया जाएगा। इससे तौल करने में सहूलियत हो जाएगी।
खाली बोरे नहीं, गेहूं कहां ले जाएं...
पीसीएफ के गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी ललित ने बताया कि 5000 क्विंटल गेहूं का लक्ष्य था। जिसके सापेक्ष में ढाई हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। सहकारी संघ के सचिव राजेश ने बताया कि संघ का गोदाम भरा पड़ा है। गेहूं लगाने की जगह नहीं है। खाली बोरे भी नहीं है। तौल कर गेहूं कहां लगाएं।
आठ ट्रॉली तौल के इंतजार में खड़ी
लहरपुर स्थानीय मंडी समिति स्थित खाद एवं रसद विभाग की ओर संचालित गेहूं क्रय केंद्र का प्रभारी का स्थानांतरण होने के बाद तौल ठप है, और किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अभी भी सात आठ ट्रॉली गेहूं से भरी मंडी में तौल का इंतजार कर रही हैं।
मंगलवार दोपहर तक किसी भी केंद्र पर नहीं हुई तौल
तंबौर (सीतापुर)। कस्बे की मंडी परिसर में चल रहे छह से अधिक गेहूं केंद्रों पर मंगलवार को दोपहर तक कोई तौल नहीं हुई। वजह, बोरों का अभाव बताया गया। किसी भी केन्द्र पर उनसे संबंधित तीन को छोड़कर कोई प्रभारी मौजूद नहीं मिला। कुछ से फोन कर उनके केंद्रों की खरीद, उठान व भुगतान की जानकारी मिल सकी।
कई केंद्रों के किसानों का करोड़ों में भुगतान भी लंबित है। मंडी परिसर में पीसी एफ, कृषि उत्पादन, साधन सहकारी समितियों, पीसीयू ,खाद्य व रसद संभाग के करीब 10 गेहूं खरीद केन्द्र संचालित है। कई केन्द्रों पर आज तक बैनर नहीं टांगे गए। साधन सहकारी समिति बसंतापुर के केंद्र प्रभारी पवन मिश्र ने बताया कि कई दिनों से मांग के बावजूद बोरे न मिलने से खरीद बाधित है। किसानों को 29 मई तक खरीद का भुगतान हो चुका है। एक केन्द्र पर शेड के नीचे काफी स्थान होने के बावजूद गेहूं का काफी स्टाक बाहर लगा था।