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सेहत की बात: अब लक्षणों से जानें कितना घातक है निमोनिया, रिसर्च में सामने आई ट्रिक; बच्चों के लिए ज्यादा खतरा

Mon, 21 Jul 2025 08:31 AM IST
भूपेन्द्र सिंह सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 21 Jul 2025 08:31 AM IST
सार

लक्षणों से अंकों की गणना करके यह जाना जा सकता है कि आपके लिए निमोनिया कितना घातक है? केजीएमयू ने साझा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के आधार पर एक खास तरह का मॉडल विकसित किया है। बिना ऑक्सीमीटर के बच्चे में निमोनिया की गंभीरता का आकलन किया जा सकता है। 

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we know how fatal pneumonia By calculating points from symptoms
निमोनिया के इलाज से जुड़ी अच्छी खबर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निमोनिया पीड़ित बच्चों में हाइपोक्सिमिया (ऑक्सीजन का स्तर 90 से नीचे जाना) जानलेवा साबित हो सकता है। केजीएमयू ने अपने साझा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में बगैर ऑक्सीमीटर हाइपोक्सिमिया का पता लगाने के लिए खास मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल में लक्षण आधारित अंकों का जोड़ पांच से ज्यादा होने का मतलब है कि बच्चे की हालत गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत है।

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यह अध्ययन बीएमजे ग्लोबल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, गांबिया, मलावी और नेपाल के 14,509 निमोनिया पीड़ित बच्चों को शामिल किया गया। इनमें से करीब 1400 बच्चे हाइपोक्सिमिया के शिकार हुए। निमोनिया पीड़ित कुल बच्चों में 56 फीसदी बालक और 44 फीसदी बालिकाएं थीं। 
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इसके अलावा 54 फीसदी की उम्र एक साल से कम थी। 62 फीसदी को छाती के निचले हिस्से में खिंचाव, 34.1 फीसदी को 99.5 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बुखार था। 6.7 फीसदी बच्चों का वजन सामान्य से कम था। केजीएमयू में बाल रोग विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. शैली अवस्थी इस अध्ययन में शामिल रहीं।

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मॉडल में ऐसे होती है अंकों की गणना

  • लक्षण -- जोखिम स्तर के लिए अंक
  • बच्चे की उम्र 11 महीने से कम -- 1
  • छाती के निचले हिस्से में खिंचाव या हिस्सा अंदर धंसा होना -- 1
  • बच्चे को सांस लेने में समस्या (नाक फूलने, घुरघुराने की आवाज और सिर हिलना) -- 2
  • एक मिनट में 20 बार से ज्यादा सांस लेना -- 2
  • कुपोषण या बच्चे का वजन सामान्य से कम -- 1

(नोट : कुल जोखिम अंक पांच या ज्यादा होना खतरे का संकेत है।)

बच्चों में होता है निमोनिया का ज्यादा खतरा

केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका गुप्ता के मुताबिक निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है। यह बैक्टीरिया की वजह से हो सकता है। इसकी वजह से फेफड़ों में सूजन और मवाद या तरल पदार्थ भर सकता है। निमोनिया किसी को हो सकता है, लेकिन छोटे बच्चों और बुजुर्गों में यह अधिक गंभीर हो जाता है। इसमें बुखार, खांसी, ठंड लगने, सांस लेने में समस्या, छाती में दर्द और भूख न लगने की समस्या हो सकती है।

जोखिम अंक पांच से ज्यादा तो बच्चे को तुरंत ले जाएं अस्पताल

केजीएमयू में बाल रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. शैली अवस्थी ने बताया कि छोटे बच्चों में निमोनिया कई बार जानलेवा साबित होता है इसकी वजह हाइपोक्सिमिया होता है। कोविड महामारी के बाद ऑक्सीमीटर का चलन बढ़ा है, लेकिन अभी भी हर जगह इसकी पहुंच नहीं है। ऐसे में यह माॅडल विकसित किया गया है। बच्चे में लक्षण के आधार पर जोखिम अंक की गणना करनी चाहिए। यदि कुल अंक पांच से ज्यादा है तो उसे तुरंत बड़े अस्पताल लेकर जाना चाहिए।

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