वाट्सअप यूजर पर आया 'प्राइवेसी' का खतरा
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मैसेंजर एप्लीकेशन वॉट्सएप के अपडेट वर्जन में शुरू किया गया वॉइस कॉलिंग फीचर सुरक्षा दृष्टिकोण से खतरनाक साबित हो सकता है। इस वॉइस कॉलिंग का कोई रिकॉर्ड न तो टेलीकॉम ऑपरेटर के पास होगा और न ही टॉवर डाटा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
इससे यह फीचर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के सामने नया सिरदर्द बन सकता है। इस एप्लीकेशन अपडेट को फिलहाल एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे स्मार्ट फोन के लिए उपलब्ध करवाया गया है।
जल्द ही इसे एप्पल अज्ञैर विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी जारी किया जाना है।लखनऊ ही नहीं पूरे देश में मौजूदा दौर में कोई अपराध हो या सुरक्षा चौकसी, मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड मददगार साबित होते हैं।
नहीं मिल सकेगा वॉट्सएप कॉल्स का रिकॉर्ड
राजधानी के कुख्यात गौरी हत्याकांड और कारोबारी अपहरण कांड सहित दर्जनों में मामलों का खुलासा करने में पुलिस को टेलीकॉम ऑपरेटरों के जरिये किए गए फोन कॉल्स से आरोपियों को दबोचने में मदद मिली है।
समस्या यह है कि वाट्सएप के इस इंटरनेट वॉइस कॉलिंग का इस्तेमाल होने पर उसका रिकॉर्ड नहीं मिल सकेगा। इससे अपराधियों का सुराग लगाने में मुश्किलें बढ़ेंगी।
गौरी हत्याकांड में वॉट्सएप से ही किए गए मैसेज को रिकवर करने व पढ़ने में पुलिस को खासी दिक्कत पेश आई थी। दूसरी ओर, 1090 पावर लाइन तक को ऐसे लोगों पर नियंत्रण करने में समस्या आ सकती है जो इन फीचर का उपयोग करके लड़कियों को परेशान कर सकते हैं।
पुलिस की साइबर इंटेलीजेंस विंग के सूत्रों के अनुसार किसी अपराध में आरोपी के फोन से की गई एक फोन कॉल पुलिस को 150 से अधिक ऐसे सूत्र व साक्ष्य देती है, जिनसे केस को खोलना आसान हो जाता है।
1090 पावर लाइन के लिए बड़ी चुनौती
वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) उस तकनीक को कहते हैं, जिनके जरिये इंटरनेट का उपयोग करते हुए फोन कॉल या वीडियो कॉल करना संभव होता है। वॉट्सएप ने अपने ताजा कॉलिंग फीचर में इसी का उपयोग किया है।
वीओआईपी किसी भी तरह से नेटवर्क ऑपरेटर पर निर्भर नहीं होता है। वह केवल नेटवर्क ऑपरेटर द्वारा दी जा रही इंटरनेट सुविधा का उपयोग किसी भी अन्य एप्लीकेशन या ऑनलाइन गेम की तरह करता है और कॉलिंग की सुविधा देता है।
हाल के दिनों में वॉट्सएप संदेशों के जरिये लड़कियों को परेशान करने की शिकायतें 1090 पावर लाइन पर बढ़ी हैं। इन मामलों में आरोपी को फोन करके चेताया जाता है, लेकिन कई मामलों में ये फोन बंद मिलने लगे हैं।
ऐसे में फोन नंबर के जरिये आरोपी के बारे में टेलीकॉम ऑपरेटर से सूचनाएं इकट्ठा करना मुश्किल प्रक्रिया बन जाता है।
फोन नंबर चेंज तो पकड़ना और मुश्किल
वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर करना होता है। लेकिन रजिस्टर होने के बाद फोन से सिम कार्ड बदल कर दूसरा फोन नंबर उपयोग करते हुए भी पुराने नंबर से ही वॉट्सएप चलाया जा सकता है।
ऐसे यूजर को फोन कॉल किया जाए तो नंबर बंद बताया जाएगा, लेकिन वॉट्सएप का इस्तेमाल होता रहेगा।
साइबर एक्सपर्ट नितनेम सिंह कहते हैं कि पुलिस किसी फोन कॉल के जरिये आरोपी को ट्रेस तभी कर सकती है जब उसके पास कॉल रिकॉर्ड्स हों। वॉट्सएप की नई तकनीक वीओआईपी पर आधारित है।
इसके रिकॉर्ड अमेरिका में कंपनी के सर्वर में जमा होते हैं। किसी मामले में ये रिकॉर्ड चाहने के लिए निजता के नियमों को तोड़ने के लिए कंपनी आसानी से तैयार नहीं होगी।
बीते वर्ष ही फेसबुक से भारत सरकार ने 10,032 मामलों में जानकारी मांगी, लेकिन जिनमें से आधे ही मामलों में जानकारी दी गई। ऐसे में फेसबुक द्वारा ही खरीदा जा चुके वॉट्सएप का यह नया फीचर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।