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अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से सुधरेगी लखनऊ में पानी की व्यवस्था

Sat, 06 Aug 2016 02:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 06 Aug 2016 02:15 PM IST
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water suply system will be under smart city project
वाटर मीटर - फोटो : demo pic

राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने का काम अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में होगा। स्मार्ट सिटी के लिए बन रही कंपनी ही इस काम को कराएगी। केंद्र सरकार के नए निर्देश पर अब जलापूर्ति को सुधारने का काम केवल कैसरबाग तक ही सीमित नहीं रहेगा। 

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क्षेत्र आधारित विकास के साथ पूरे शहर में जलापूर्ति के ढांचे को सुधारा जाएगा। नॉन रेवेन्यू वाटर पर अंकुश लगाने के लिए पूरे शहर में वाटर मीटर लगाए जाएंगे।
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नगर निगम के स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद पूरे शहर में पानी की आपूर्ति को बेहतर करना है। यह काम लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी एक कंसल्टेंट एजेंसी की मदद से करेगी। कंसल्टेंट का चयन  एलएससीएल ही करेगी।
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इसके लिए गाइडलाइन भी केंद्र सरकार ने भेज दी है। कंसल्टेंट का काम शहर में सर्वे करने के बाद जलापूर्ति में आ रही समस्याओं का चिह्नित करना होगा। मीटर लगाने की संभावना पर भी कंसल्टेंट काम करेगा।

सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर कंसल्टेंट तीन से पांच साल की योजना बनाकर एलएससीएल को देगा। इस योजना को अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी एलएससीएल की होगी। इसके लिए जरूरी बजट का इंतजाम अमृत योजना में मिले फंड से किया जाएगा।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सुधारेगी वाटर व्यवस्था

water suply system will be under smart city project
डेमो

पांच लाख घरों और 40 लाख की आबादी वाले इस शहर में सुचारु वाटर सप्लाई में सबसे बड़ा संकट लीकेज है। लीकेज की वजह से गंदे पानी और कम प्रेशर की समस्या पैदा होती है। कई इलाकों में पानी भी नहीं पहुंच पाता

इससे निबटने के लिए भी लीकेज के बिंदुओं को कंसल्टेंट चिह्नित करेगा। इन जगहों पर विशेष ध्यान देकर समस्या सुलझाई जाएगी। नगर निगम के अफसरों का कहना है कि नॉन रेवेन्यू वाटर टर्म का इस्तेमाल पानी के उस हिस्से के लिए किया जाता है, जिस पर जलकल या नगर निगम को कोई आय नहीं होती।

राजधानी में अभी वाटर मीटर नहीं लग पाए हैं। ऐसे में एकमुश्त बिल मकान के आकार और उपयोग के आधार पर तय कर लिया जाता है। एनआरडब्ल्यू में सिस्टम बनाकर सप्लाई किए जाने वाले पूरे पानी की कीमत वसूलने की तैयारी है।

नगर निगम के अफसरों का कहना है कि कंपनी बनने की प्रक्रिया अभी चल रही है। जल्दी ही कंपनी का सर्टिफिकेट कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से मिल जाएगा। इसके बाद विधिवत कंपनी काम करना शुरू कर देगी।

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