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संभलिए! हमारी पहुंच से बहुत दूर जा रहा पानी, 70 सेमी हर साल राजधानी में नीचे सरक रहा जल स्तर
Wed, 03 Jul 2019 02:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jul 2019 02:03 AM IST
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प्रतिकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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राजधानी में हर साल 70 सेमी तक भूजल स्तर नीचे जा रहा है। कुछ इलाके तो ऐसे हैं कि जहां हर साल एक मीटर से भी अधिक भूजल स्तर गिर जा रहा है। ऐसे ही हालात रहे तो वह दिन दूर नहीं कि अगली पीढ़ी की जगह अपनी ही पीढ़ी की चिंता करनी होगी कि कैसे पानी मिलेगा।
लखनऊ के आठ विकासखंडों में से तीन में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इनमें से दो सरोजनीनगर और काकोरी तक शहर का विस्तार हो चुका है। वहीं बख्शी का तालाब भी शहरी क्षेत्र में बदल चुका है। यहां 2014 से 2018 के बीच 3.73 मीटर से 4.85 मीटर तक भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल बारिश की वजह से भूजल स्तर में मामूली सुधार हुआ, लेकिन पूर्व की स्थिति में नहीं आ पाया। सबसे बुरा हाल सरोजनीनगर में है। यहां चार साल का प्री-मानसून डाटा देखें तो भूजल स्तर 4.85 मीटर तक गिरा है।
गाड़ियां, घर और सड़क धोने में बह रहा पानी
भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की बर्बादी सबसे अधिक लखनऊ में गाड़ियां, घर, सड़क धोने के नाम पर की जाती है। ऐसा न हो तो तो रोजाना लाखों लीटर पानी बचाया जा सकता है। इसके अलावा गोमती नदी की जगह भूजल पर निर्भरता भी खतरनाक रूप से ले रही है। पानी का बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग भी खतरा पैदा कर रहा है।
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बारिश का पानी भी नहीं रोक पा रहे
एक डरावना तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि बारिश के समय भी कई जगह भूजल स्तर में गिरावट मिल रही है। तालाबों के पाट दिए जाने के कारण बारिश का पानी बह जा रहा है। ऐसे में भूजल रिचार्ज नहीं हो रहा है। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी इलाके में 2463 तालाबों पर कब्जे बने हुए हैं। इनको कब्जा मुक्त कराने और संरक्षित करने के लिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। कब्जे चिह्नित होने के बाद भी केवल 57 को ही कब्जा मुक्त कराया जा सका है।
उपाय सुझाए गए, लेकिन काम भी हो
भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने 2018 में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर में मुगलकालीन व्यवस्था भंडारा और तमिलनाडु के रामनाथपुरम में में अलग-अलग तालाबों को जोड़कर पानी को समुद्र में जाने से रोकने जैसे प्रयोग अपनाने के सुझाव दिए। बारिश और प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले पानी को बचाने और इसका जलापूर्ति में उपयोग करना सुनिश्चित करने के लिए अभी आगे प्रयास नहीं हो पाए हैं। रामनाथपुरम में एक शृंखला के तहत करीब 317 तालाब यहां जोड़ दिए गए। वहीं लखनऊ में अधिकारियों के पास इसके एक चौथाई भी तालाब संरक्षित नहीं किए जा सके हैं।
कहां कितना गिरा भूजल
विकासखंड प्री-मानसून पोस्ट-मानसून
बख्शी का तालाब 3.73 0.78
चिनहट 0.50 1.95
गोसाईंगंज 0.14 1.93
काकोरी 4.77 2.99
माल 4.70 1.81
मलिहाबाद 0.53 0.12
मोहनलालगंज 1.39 1.23
सरोजनीनगर 4.85 2.48
(सभी आंकड़े 2014 से 2018 के हैं। आंकड़े मानसून से पहले और बाद के डाटा के औसत अंतर के रूप में हैं। पानी जमीनी स्तर से नीचे मीटर (एमबीजीएल) के अनुसार हैं।)
कोई पानी की बर्बादी करे तो बताएं
व्हाट्सअप नंबर - 8392946712
ईमेल - lko-cityreporter@lko.amarujala.com
अगर आपके आसपास कोई पानी बर्बाद कर रहा है तो उसके फोटोग्राफ और इससे जुड़ी सूचना हमें भेजें। इसे सक्षम अधिकारी के सामने उठाकर जरूरी कार्रवाई कराई जाएगी। इससे ही हम भविष्य के लिए पानी संरक्षित कर पाएंगे।
अंधाधुंध दोहन नहीं रुका तो होगी परेशानी
लखनऊ में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। हर साल 70 सेमी की औसत गिरावट खतरनाक हो जाएगी। इस तेजी से पानी में गिरावट का मतलब है कि अगले कुछ साल में भूजल से भी पानी नहीं मिल जाएगा। हमें हालात को समझना होगा। जल्दी ही अंधाधुंध दोहन नहीं रोका गया तो संकट तय है। कुछ इलाकों में अभी से पानी की दिक्कत बनी हुई है।
-अनुपम श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता व प्रभारी लखनऊ डिवीजन, भूगर्भ जल विभाग
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लखनऊ के आठ विकासखंडों में से तीन में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इनमें से दो सरोजनीनगर और काकोरी तक शहर का विस्तार हो चुका है। वहीं बख्शी का तालाब भी शहरी क्षेत्र में बदल चुका है। यहां 2014 से 2018 के बीच 3.73 मीटर से 4.85 मीटर तक भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल बारिश की वजह से भूजल स्तर में मामूली सुधार हुआ, लेकिन पूर्व की स्थिति में नहीं आ पाया। सबसे बुरा हाल सरोजनीनगर में है। यहां चार साल का प्री-मानसून डाटा देखें तो भूजल स्तर 4.85 मीटर तक गिरा है।
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गाड़ियां, घर और सड़क धोने में बह रहा पानी
भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की बर्बादी सबसे अधिक लखनऊ में गाड़ियां, घर, सड़क धोने के नाम पर की जाती है। ऐसा न हो तो तो रोजाना लाखों लीटर पानी बचाया जा सकता है। इसके अलावा गोमती नदी की जगह भूजल पर निर्भरता भी खतरनाक रूप से ले रही है। पानी का बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग भी खतरा पैदा कर रहा है।
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बारिश का पानी भी नहीं रोक पा रहे
एक डरावना तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि बारिश के समय भी कई जगह भूजल स्तर में गिरावट मिल रही है। तालाबों के पाट दिए जाने के कारण बारिश का पानी बह जा रहा है। ऐसे में भूजल रिचार्ज नहीं हो रहा है। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी इलाके में 2463 तालाबों पर कब्जे बने हुए हैं। इनको कब्जा मुक्त कराने और संरक्षित करने के लिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। कब्जे चिह्नित होने के बाद भी केवल 57 को ही कब्जा मुक्त कराया जा सका है।
उपाय सुझाए गए, लेकिन काम भी हो
भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने 2018 में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर में मुगलकालीन व्यवस्था भंडारा और तमिलनाडु के रामनाथपुरम में में अलग-अलग तालाबों को जोड़कर पानी को समुद्र में जाने से रोकने जैसे प्रयोग अपनाने के सुझाव दिए। बारिश और प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले पानी को बचाने और इसका जलापूर्ति में उपयोग करना सुनिश्चित करने के लिए अभी आगे प्रयास नहीं हो पाए हैं। रामनाथपुरम में एक शृंखला के तहत करीब 317 तालाब यहां जोड़ दिए गए। वहीं लखनऊ में अधिकारियों के पास इसके एक चौथाई भी तालाब संरक्षित नहीं किए जा सके हैं।
कहां कितना गिरा भूजल
विकासखंड प्री-मानसून पोस्ट-मानसून
बख्शी का तालाब 3.73 0.78
चिनहट 0.50 1.95
गोसाईंगंज 0.14 1.93
काकोरी 4.77 2.99
माल 4.70 1.81
मलिहाबाद 0.53 0.12
मोहनलालगंज 1.39 1.23
सरोजनीनगर 4.85 2.48
(सभी आंकड़े 2014 से 2018 के हैं। आंकड़े मानसून से पहले और बाद के डाटा के औसत अंतर के रूप में हैं। पानी जमीनी स्तर से नीचे मीटर (एमबीजीएल) के अनुसार हैं।)
कोई पानी की बर्बादी करे तो बताएं
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ईमेल - lko-cityreporter@lko.amarujala.com
अगर आपके आसपास कोई पानी बर्बाद कर रहा है तो उसके फोटोग्राफ और इससे जुड़ी सूचना हमें भेजें। इसे सक्षम अधिकारी के सामने उठाकर जरूरी कार्रवाई कराई जाएगी। इससे ही हम भविष्य के लिए पानी संरक्षित कर पाएंगे।
अंधाधुंध दोहन नहीं रुका तो होगी परेशानी
लखनऊ में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। हर साल 70 सेमी की औसत गिरावट खतरनाक हो जाएगी। इस तेजी से पानी में गिरावट का मतलब है कि अगले कुछ साल में भूजल से भी पानी नहीं मिल जाएगा। हमें हालात को समझना होगा। जल्दी ही अंधाधुंध दोहन नहीं रोका गया तो संकट तय है। कुछ इलाकों में अभी से पानी की दिक्कत बनी हुई है।
-अनुपम श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता व प्रभारी लखनऊ डिवीजन, भूगर्भ जल विभाग