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Lucknow News: टेसू से भरेगी पिचकारी, फूलों से बने गुलाल रखेंगे त्वचा का ख्याल

Wed, 25 Feb 2026 02:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Wed, 25 Feb 2026 02:33 AM IST
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Water guns will be filled with Tesu, Gulal made from flowers will take care of the skin.
डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में स्टॉल संचालक। 
लखनऊ। होली के त्योहार पर सस्ते और मानकविहीन केमिकल रंगों से दूरी बनाकर अब लोग सेहत को प्राथमिकता देने लगे हैं। यही कारण है कि वर्षों से नेपथ्य में चले गए प्राकृतिक और पारंपरिक रंगों का चलन एक बार फिर तेजी से लौट रहा है। टेसू के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंग, सूखे फूलों और हरी सब्जियों से बने गुलाल तथा खाद्य रंगों से तैयार हर्बल रंगों की मांग लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि इन प्राकृतिक रंगों की कीमतें भी बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंगों से बहुत अलग नहीं हैं।
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पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों के बीच प्राकृतिक रंगों का क्रेज बढ़ा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से लेकर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के स्टॉलों तक इनकी आसान उपलब्धता है। तिलकमार्ग, डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में भी प्राकृतिक उत्पादों की भरमार देखने को मिल रही है।
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कानपुर की गीतांजलि सचान यहां टेसू के फूल लेकर आई हैं। वह बताती हैं कि 20 रुपये कीमत वाला टेसू के फूलों का एक पैकेट दो बाल्टी रंग तैयार करने के लिए पर्याप्त होता है। रातभर पानी में भिगोकर रखने से सुबह तक गहरा ब्राउन और मस्टर्ड रंग तैयार हो जाता है। देखने में हल्का लगने वाला यह प्राकृतिक रंग काफी पक्का होता है। कपड़ों से देर में छूटता है, लेकिन त्वचा के लिए बेहद सुरक्षित माना जाता है। मान्यता है कि प्राचीन काल में देवताओं तक ने टेसू के रंगों से होली खेली थी और देश के कई मंदिरों में आज भी यही परंपरा निभाई जाती है। उन्होंने बताया कि ये फूल बुंदेलखंड से मंगवाए जाते हैं और लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
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मंदिरों के सूखे फूल और सब्जियों से तैयार गुलाल

फोटो
मंदिरों में चढ़ाए जाने के बाद बचने वाले सूखे फूलों का भी अब उपयोग हो रहा है। चिनहट की आराधना इन फूलों को पीसकर प्राकृतिक गुलाल तैयार कर रही हैं। गेंदा, गुलाब और पालक के अर्क से पीला, गुलाबी और हरा गुलाल बनाया जाता है। हरे रंग के लिए पालक, चुकंदर और धनिया के पाउडर का उपयोग किया जाता है। फूलों के महीन पाउडर को मक्का के आटे में मिलाकर तैयार किया गया यह गुलाल पूरी तरह केमिकल मुक्त होता है। इस कार्य से स्वयं सहायता समूह की कई महिलाएं जुड़ी हुई हैं। 200 ग्राम का एक पैकेट 100 रुपये में उपलब्ध है।


खाद्य रंगों से तैयार हो रहे हर्बल रंग
फोटो

खादी भवन में प्राकृतिक उत्पादों का शोरूम संचालित करने वाले नीरज बताते हैं कि खाद्य उपयोग में आने वाले रंगों से ही हर्बल रंग तैयार किए जा रहे हैं। 35 रुपये की डिब्बी में गीला रंग उपलब्ध है, जबकि रंग-बिरंगा गुलाल अलग पैकेट में मिलता है। यह पांच अलग-अलग रंगों में उपलब्ध है। गीले रंग में मौजूद अर्क पानी के संपर्क में आने पर गाढ़ा हो जाता है, जबकि गुलाल को हल्का बनाने के लिए उसमें अरारोट मिलाया जाता है।

डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में स्टॉल संचालक। 

डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में स्टॉल संचालक। 

डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में स्टॉल संचालक। 

डालीबाग स्थित खादी भवन में लगी प्रदर्शनी में स्टॉल संचालक। 

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