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पार्श्वनाथ डेवलपर के छह अफसरों के खिलाफ वारंट

Wed, 03 Sep 2014 03:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Sep 2014 03:45 AM IST
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warrent against parsvnath builders.

करीब साढ़े पांच सौ आवंटियों को तय समय पर फ्लैटों पर कब्जा न देने के मामले में पार्श्वनाथ डवलपर के अधिकारियों पर कानून का शिकंजा कस गया है।

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मुख्य न्यायिक अधिकारी (सीजेएम) सुनील कुमार यादव ने मंगलवार को कंपनी के छह अधिकारियों के खिलाफ जनवरी-2012 में दर्ज मामले गैर जमानती वारंट जारी किया है।
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पार्श्वनाथ प्लेनेट के आवंटियों ने इन अधिकारियों पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज करवाया गया था।

इस मामले में विभूतिखंड पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी करने का आदेश देने की अर्जी दाखिल की थी।

जिसे बाद में गैर जमानती वारंट में जनवरी 2012 में पार्श्वनाथ प्लेनेट के आवंटियों ने ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद फ्लैटों पर कब्जा न देने पर जमकर हंगामा किया था।
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फ्लैटों पर कब्जा न देने पर आवंटियों ने सीधे तत्कालीन डीआईजी/एसएसपी से डवलपर की शिकायत की थी।

इसके बाद कंपनी के चेयरमैन प्रदीप जैन, डायरेक्टर संजीव जैन और राजीव जैन और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुनीत सच्चर, जनरल मैनेजर अजय कश्यप और आरएम ब्रह्मप्रकाश ढाका के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

आंदोलन के बाद दर्ज हुआ था केस
जनवरी-2012 की शुरुआत में लगातार तीन दिन से आवंटी पुलिस के दरवाजे पर दस्तक दे रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।

इसके बाद आवंटी डीआईजी/एसएसपी से शिकायत करने गए थे। जहां से आदेश के बाद मुकदमा विभूतिखंड थाने में दर्ज किया गया था।

बी-26 पुलिस लाइन में रहने वाली अधिवक्ता वीरा श्रीवास्तव की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था।

वीरा ने शिकायत की थी कि, जिस साइट पर फ्लैट बनाए जाने हैं, वहां पिछले कई महीने से कोई काम नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने फ्लैट की पूरी कीमत अदा कर दी है। लेकिन उन्हें डर है कि बिल्डर उनका पूरा पैसा हड़प लेगा।

तहरीर पर पुलिस ने पार्श्वनाथ के चेयरमैन प्रदीप जैन, एमडी प्रदीप जैन, संजीव जैन और निदेशक राजीव जैन के अलावा लखनऊ में बैठने वाले रीजनल हेड रिटायर्ड विंग कमांडर एमएम जौहरी के खिलाफ धारा-420 और 406 के तहत केस दर्ज कर लिया गया था।

इसी केस के बाद में भी दो अन्य केस भी दर्ज हुए, जिन पर एक साथ पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी की अर्जी दाखिल की थी।

इसको लेकर पुलिस की ओर से कहा गया कि, कई बार उनको हाजिर होने का नोटिस तामील किया गया मगर नोटिस नहीं रिसीव किया। इस पर पुलिस की अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया।

एलडीए ने दी 30 दिन की डेडलाइन

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पार्श्वनाथ डवलपर्स के अधिकारियों को एक महीने का समय दिया है। इस एक महीने के भीतर कंपनी को सभी ब्लॉक का काम पूरा करवा कर कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना पड़ेगा।


जिसके बाद में वे आवंटियों को कब्जा देंगे। एलडीए के अधिशासी अभियंता डीसी श्रीवास्तव ने विकासकर्ता के अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में कमियों की जानकारी दी।

उन्होंने सचिव अष्टभुजा प्रसाद तिवारी को बताया कि, अभी अग्निशमन से जुड़े अनेक काम नहीं किए गए हैं। इनको पूरा किए बिना कम्प्लीशन दिया जाना संभव नहीं होगा। जिस पर सचिव ने एक महीने के भीतर हर हाल में सारे काम पूरा करने का आदेश दिया है।

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