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Lucknow News: 19 दिन के बच्चे के इलाज के लिए 36 घंटे भटके
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लखनऊ। एशिया के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान होने का दावा करने वाले किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल एक बार फिर खुल गई। यहां के नेत्र रोग विभाग में 19 दिन के बच्चे को इलाज नहीं मिल सका, जबकि उसकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा था। इतना ही नहीं डॉक्टर बहराइच से आए परिवार को 36 घंटे तक संस्थानों की दौड़ लगवाते रहे।
आखिर में वह बच्चे को एसजीपीजीआई ले गए, जहां उसे इंजेक्शन की डोज दी गई। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि अफसरों ने कार्रवाई करने के बजाय मामले के निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी, जिस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई है।
बहराइच निवासी तौफीक मोहम्मद अंसारी महाराष्ट्र में कैटरिंग मैनेजर हैं। वह अपने 19 दिन के बच्चे को 26 मई को केजीएमयू लाए। उसकी आंख की रोशनी बचाने के लिए तत्काल इंजेक्शन लगाने की जरूरत थी। हालांकि, इलाज करने के बजाय परिजनों को ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। वहां से चौथे तल पर बने बच्चों के वार्ड भेज दिया गया। फिर वहां से नेत्र रोग विभाग रेफर कर दिया गया, जहां डॉक्टरों ने इलाज न होने की बात कहते हुए निजी अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
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इसके बाद तौफीक बच्चे को लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, यहां भी मुकम्मल इलाज नहीं मिला। इस पर वह फिर केजीएमयू आए, जहां से एसजीपीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में मासूम का इलाज हुआ। इस पूरी दौड़ में 36 घंटे बीत गए।
तौफीक ने बताया कि इलाज न मिलने से बेटे की आंख की रोशनी जाने का खतरा बढ़ गया था। 27 मई को एसजीपीजीआई की ओपीडी में डॉक्टरों ने जांच कर तुरंत दो इंजेक्शन लगाए। इस पर 40 हजार रुपये का खर्च आया। तौफीक ने केजीएमयू की लापरवाही की मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उनका यह भी आरोप है कि अफसरों ने मामले में कार्रवाई करने के बजाय पोर्टल पर गलत तरीके से रिपोर्ट लगाकर निस्तारित कर दिया।
कोट्स
शिकायत मिली है। मामले की गहनता से जांच कराई जा रही है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।
- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
बच्चे को इलाज न मिलने के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत आती है तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. भुवन, प्रवक्ता, लोहिया संस्थान
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आखिर में वह बच्चे को एसजीपीजीआई ले गए, जहां उसे इंजेक्शन की डोज दी गई। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि अफसरों ने कार्रवाई करने के बजाय मामले के निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी, जिस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई है।
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बहराइच निवासी तौफीक मोहम्मद अंसारी महाराष्ट्र में कैटरिंग मैनेजर हैं। वह अपने 19 दिन के बच्चे को 26 मई को केजीएमयू लाए। उसकी आंख की रोशनी बचाने के लिए तत्काल इंजेक्शन लगाने की जरूरत थी। हालांकि, इलाज करने के बजाय परिजनों को ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। वहां से चौथे तल पर बने बच्चों के वार्ड भेज दिया गया। फिर वहां से नेत्र रोग विभाग रेफर कर दिया गया, जहां डॉक्टरों ने इलाज न होने की बात कहते हुए निजी अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
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इसके बाद तौफीक बच्चे को लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, यहां भी मुकम्मल इलाज नहीं मिला। इस पर वह फिर केजीएमयू आए, जहां से एसजीपीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में मासूम का इलाज हुआ। इस पूरी दौड़ में 36 घंटे बीत गए।
तौफीक ने बताया कि इलाज न मिलने से बेटे की आंख की रोशनी जाने का खतरा बढ़ गया था। 27 मई को एसजीपीजीआई की ओपीडी में डॉक्टरों ने जांच कर तुरंत दो इंजेक्शन लगाए। इस पर 40 हजार रुपये का खर्च आया। तौफीक ने केजीएमयू की लापरवाही की मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उनका यह भी आरोप है कि अफसरों ने मामले में कार्रवाई करने के बजाय पोर्टल पर गलत तरीके से रिपोर्ट लगाकर निस्तारित कर दिया।
कोट्स
शिकायत मिली है। मामले की गहनता से जांच कराई जा रही है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।
- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
बच्चे को इलाज न मिलने के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत आती है तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. भुवन, प्रवक्ता, लोहिया संस्थान