वोटिंग कर तोड़ दिया 43 साल पुराना रिकॉर्ड
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लखनऊ की जनता ने भीषण तपिश को धता बताते हुए मतदान का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिस पर निर्वाचन आयोग ने खुशी जताई है।
वोट देने के मामले में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 43 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया है। यहां पर 1971 के बाद पहली बार इतनी अधिक तादाद में मतदाताओं ने वोट दिए हैं।
लखनऊ की जनता ने भीषण तपिश की परवाह किए बगैर बुधवार को खूब मतदान किया। हालांकि 1962 में 58.49 फीसदी व 1967 में 57.88 फीसदी का रिकॉर्ड नहीं टूट सका।
मतदान करने के लिए मतादाताओं को जागरूक करने की चुनाव आयोग की मुहिम ने भी राजधानी लखनऊ में अपना रंग दिखाया।
1977 में भी हुआ भारी मतदान
पिछले लोकसभा चुनाव से इस बार 19 फीसदी अधिक वोट नवाबों के इस शहर में पड़े हैं। 1977 में जब हेमवती नंदन बहुगुणा भारतीय लोकदल से चुनाव लड़े थे उस समय भी 54.21 प्रतिशत वोट पड़े थे।
लेकिन इसके बाद के सभी आठ चुनावों में से 1996 का चुनाव छोड़ दिया जाए तो राजधानी में मतदान प्रतिशत 50 फीसदी के आंकड़े को भी पार नहीं कर सका।
राजधानी की सीट पर सबसे कम मतदान 28.65 फीसदी वोट 1989 के चुनाव में पड़े थे। उस समय जनता दल से मान्धाता सिंह चुनाव जीते थे।
इसके बाद से 1991 से लेकर 2004 तक के पांच लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के टिकट से चुनाव लड़े। इन चुनावों में भी 32 प्रतिशत से लेकर 50 फीसदी के अंदर ही वोट पड़े थे। 2004 व 2009 के चुनाव में भी लखनऊ की जनता ने मात्र 35 प्रतिशत ही मतदान किया।
उमेश सिंहा ने दी बधाई
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा कहना है कि राजधानी की जनता बधाई की पात्र है। उसने लोकतंत्र के इस महापर्व की अहमियत समझते हुए अपना बेशकीमती वोट दिया। मतदाताओं ने गर्मी की परवाह किए बगैर इतनी अधिक तादाद में वोट डाला है। इसके लिए सभी का तहे दिल से शुक्रिया।
लखनऊ में कब कितने पड़े वोट
वर्ष-प्रतिशत
1951-42.02
1957-45.12
1962-58.49
1967-57.88
1971-47.11
1977-54.21
1980-38.15
1984-40.93
1989-28.65
1991-32.23
1996-50.78
1998-49.35
1999-48.57
2004-35.28
2009-35.33
2014-54.35