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Lucknow News: दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने पास की आत्मनिर्भरता की परीक्षा

Wed, 07 Jan 2026 02:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Wed, 07 Jan 2026 02:36 AM IST
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Visually impaired students pass the self-reliance test
सह लेखक के बिना परीक्षा देती बीए की छात्रा श्वेता आंचल। निगरानी करते कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह।
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव किया है। विश्वविद्यालय में पहली बार बिना सह-लेखक के सेमेस्टर परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें दो दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने तकनीक के सहारे स्वयं उत्तर लिखे।
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बीए पांचवें सेमेस्टर की छात्रा श्वेता आंचल और छात्र सुयश पांडेय ने अपने-अपने लैपटॉप के माध्यम से परीक्षा दी। प्रश्नपत्र यूएसबी ड्राइव में उपलब्ध कराए गए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुलभ, पारदर्शी और स्वायत्त बनाया गया।
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परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों ने स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर और हेडफोन की मदद से प्रश्न सुने और की-बोर्ड के जरिये अपने उत्तर स्वयं टाइप किए। इस प्रक्रिया में किसी सह-लेखक की जरूरत नहीं पड़ी। इससे परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता के साथ-साथ विद्यार्थियों की आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित हुई।
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छह माह का प्रशिक्षण बना आधार
इस पहल से पहले दोनों विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में छह माह तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कंप्यूटर संचालन, स्क्रीन रीडर का उपयोग, की-बोर्ड दक्षता और परीक्षा-उन्मुख तकनीकी अभ्यास शामिल रहा। प्रशिक्षण के कारण विद्यार्थी परीक्षा के दौरान पूरी तरह सहज नजर आए।

खर्च से भी मिलेगी राहत
अब तक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए सह-लेखक रखना पड़ता था, जिस पर पूरी परीक्षा अवधि में पांच से दस हजार रुपये तक का खर्च आता था। स्क्राइब-फ्री व्यवस्था से यह आर्थिक बोझ भी खत्म होगा।

विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया
श्वेता आंचल ने कहा, विश्वविद्यालय में मिले प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा। पहली बार पूरी स्वतंत्रता के साथ अपने उत्तर लिख पाई। यह अनुभव सशक्तिकरण जैसा है।


सुयश पांडेय ने कहा, लगातार अभ्यास के कारण लैपटॉप का उपयोग आसान हो गया। परीक्षा में किसी पर निर्भर न रहना हमारे लिए सम्मान की बात है।


कुलपति आचार्य संजय सिंह के अनुसार यह पहल दिव्यांग विद्यार्थियों को समान अवसर देने की दिशा में ठोस कदम है। स्क्राइब-फ्री परीक्षा से विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमता का निष्पक्ष मूल्यांकन संभव होगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

सह लेखक के बिना परीक्षा देती बीए की छात्रा श्वेता आंचल। निगरानी करते कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह।

सह लेखक के बिना परीक्षा देती बीए की छात्रा श्वेता आंचल। निगरानी करते कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह।

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