दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को कानपुर में शुक्रवार सुबह यूपी पुलिस ने मार गिराया। पुलिस के अनुसार, कानपुर लाए जाने के दौरान उसने गाड़ी पलट जाने पर पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की जिस पर एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया गया।
विकास के एनकाउंटर पर लखनऊ में उसकी मां सरला से जब पड़ोसियों ने कानपुर जाने के लिए वाहन का प्रबंध करने के लिए पू्छा तो सरला ने कहा कि मुझे कानपुर नहीं जाना। विकास दुबे के साथ मेरा कोई संबंध नहीं है।
वहीं, गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर में उसकी गिरफ्तारी पर सरला ने कहा था कि सबको लगता था कि विकास का एनकाउंटर हो जाएगा लेकिन भोले बाबा ने उसे बचा लिया। हालांकि, शुक्रवार सुबह उसका एनकाउंटर कर दिया गया।
सरला ने बताया था कि विकास हर साल महाकाल दर्शन करने उज्जैन जाता था। भोले बाबा का शृंगार भी कराता था।
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विकास दुबे की मां सरला।
- फोटो : amar ujala
बेटे ने पुलिसकर्मियों को मारा, मैं उसे निर्दोष नहीं मानती
सरला ने कहा था कि बेटे ने पुलिसकर्मियों को मारा है। हम उसे क्यों और कैसे निर्दोष बता दें। पहले भी हमने कभी ऐसी बात नहीं की। उसके साथ जो कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए, वह अपनाई जाए। उसे कोर्ट से जो भी सजा मिलेगी, उसे माना जाएगा।
शहीदों के लिए मन दर्द से भरा, खाना भी गले से नहीं उतरता
पुलिसकर्मियों की शहादत का जिक्र करने पर विकास की मां सरला भावुक हो गईं थीं। उन्होंने कहा कि शहीद पुलिसकर्मियों के लिए उनका मन दर्द से भरा है। वह रोज शहीदों के लिए रोती हैं। इस घटना के बाद तीन दिन तक उन्होंने और घर के किसी भी सदस्य ने खाना नहीं खाया था। कोई पुलिसकर्मी बच्चों को एक नमकीन का पैकेट दे गया था। इसके अलावा किसी के गले से निवाला नहीं उतरा।
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विकास दुबे व उसकी पत्नी।
- फोटो : amar ujala
विकास के लिए रहम की अपील करने से सरला ने कर दिया था इनकार
सरला ने कहा था कि वह सरकार से कोई रहम की अपील नहीं करेंगी। हमारे कहने से अब कुछ नहीं होगा। सरकार के पास इतनी फोर्स है, इतने संसाधन है कि वो जो चाहे कर सकती है। फिर, उसके लिए विकास के पास बहुत सारी नेता-नगरी है। इस वक्त वह भाजपा में नहीं, सपा में है। फिर भी उसके साथ कई नेता हैं। सरला ने कहा कि जिन्होंने इतना बड़ा कांड कराया, विकास को वह खुद ही बताएंगे कि आगे क्या करना है?
विकास दुबे एनकाउंटर से जुड़ीं घटना के बारे में अब लगातार नई जानकारियां आ रही हैं। इनमें से सबसे नई जानकारी यह निकलकर सामने आई है कि मीडिया की वो गाड़ियां जो एसटीएफ के काफिले के पीछे चल रही थीं, उन्हें घटनास्थल से 30-32 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था।