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Lucknow News: विजय तेंदुलकर के नाटकों से सजी शाम
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नाटक का मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। राजधानी में बुधवार की शाम मशहूर नाटककार विजय तेंदुलकर के नाटकों के नाम रही। श्री रंग कला सेवा संस्थान की ओर से कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में उनके नाटकों ''गिद्ध’ व ‘फुटपाथ का सम्राट’ का मंचन किया गया। उधर, थिंकिंग व्हाइल स्लीपिंग पिक्चर्स संस्था ने गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी में ‘जाति ही पूछो साधु की’ नाटक का मंचन किया।
''गिद्ध'' की कहानी ऐसे घर की है, जहां रमाकांत और उमाकांत पिता की दौलत पर गिद्ध-दृष्टि रखते हैं और इस इंतजार में हैं कि कब उनकी मृत्यु हो और सारी दौलत उनकी हो जाए। दौलत पाने की लालसा उन्हें इतना गिरा देती है, जहां इंसानी रिश्ते बेमानी साबित हो जाते हैं। आदर्श तिवारी, राहुल मिश्रा, एकता सिंह और मुस्कान सोनी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। नाटक का संयोजन सत्यवान और निर्देशन रुचिका ने किया।
‘फुटपाथ का सम्राट’ में फुटपाथ पर जिंदगी गुजार रहे लोगों की कहानी को प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा गया। मुख्य पात्र साहिर और तुक्या अच्छे दोस्त होते हैं और अपने फुटपाथ पर ही रहते हैं। फुटपाथ की कठिनाइयों को दिखाते हुए समाज में संदेश देने की कोशिश की गई कि जीवन में जो मिलता है, वह उतना काफी है। इसका भी निर्देशन रुचिका ने किया। आदर्श, एकता और प्रमोद सहाय ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
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नाटक ‘जाति ही पूछो साधु की’ समाज में व्याप्त जातिगत पूर्वाग्रहों, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय मूल्यों के द्वंद्व को व्यंग्यात्मक शैली में पेश किया गया। नाटक में हास्य का पुट भी देखने को मिला, जिसमें समाज के संवेदनशील पक्षों को उजागर किया। निर्देशन सत्येंद्र त्रिवेदी ने किया। सत्येंद्र त्रिवेदी, तनु पांडेय, यजुवेंद्र कमल, सचिन पांडेय, प्रेम यादव, आकाश भारती, भूमि मिश्रा, दीपक कर्णवाल ने अहम भूमिकाएं निभाईं।
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''गिद्ध'' की कहानी ऐसे घर की है, जहां रमाकांत और उमाकांत पिता की दौलत पर गिद्ध-दृष्टि रखते हैं और इस इंतजार में हैं कि कब उनकी मृत्यु हो और सारी दौलत उनकी हो जाए। दौलत पाने की लालसा उन्हें इतना गिरा देती है, जहां इंसानी रिश्ते बेमानी साबित हो जाते हैं। आदर्श तिवारी, राहुल मिश्रा, एकता सिंह और मुस्कान सोनी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। नाटक का संयोजन सत्यवान और निर्देशन रुचिका ने किया।
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‘फुटपाथ का सम्राट’ में फुटपाथ पर जिंदगी गुजार रहे लोगों की कहानी को प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा गया। मुख्य पात्र साहिर और तुक्या अच्छे दोस्त होते हैं और अपने फुटपाथ पर ही रहते हैं। फुटपाथ की कठिनाइयों को दिखाते हुए समाज में संदेश देने की कोशिश की गई कि जीवन में जो मिलता है, वह उतना काफी है। इसका भी निर्देशन रुचिका ने किया। आदर्श, एकता और प्रमोद सहाय ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
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नाटक ‘जाति ही पूछो साधु की’ समाज में व्याप्त जातिगत पूर्वाग्रहों, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय मूल्यों के द्वंद्व को व्यंग्यात्मक शैली में पेश किया गया। नाटक में हास्य का पुट भी देखने को मिला, जिसमें समाज के संवेदनशील पक्षों को उजागर किया। निर्देशन सत्येंद्र त्रिवेदी ने किया। सत्येंद्र त्रिवेदी, तनु पांडेय, यजुवेंद्र कमल, सचिन पांडेय, प्रेम यादव, आकाश भारती, भूमि मिश्रा, दीपक कर्णवाल ने अहम भूमिकाएं निभाईं।

नाटक का मंचन करते कलाकार।

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नाटक का मंचन करते कलाकार।

नाटक का मंचन करते कलाकार।

नाटक का मंचन करते कलाकार।