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आजम ने की भाजपाइयों की बेइज्जती, तीखे तंज कसे!

Mon, 09 Mar 2015 09:04 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 09 Mar 2015 09:04 PM IST
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Vidhan sabha session in Uttar Pradesh.

प्रदेश में असमायिक वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों की भारी तबाही का मामला सोमवार को विधानसभा में गूंजा। जब भाजपा विधायकों ने इसे मुद्दा बनाकर आवाज उठाई तो संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने इसे योजनाबद्घ किया गया विरोध बताया और भाजपाइयों की जमकर बेइज्जती की। हुआ यूं कि भाजपा ने पहले प्रश्न प्रहर में यह मामला उठाने की कोशिश लेकिन अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने अनुमति नहीं दी।

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शून्य प्रहर में भाजपा ने यह मामला काम रोको प्रस्ताव के जरिये उठाते हुए कहा कि किसानों की पूरी फसल चौपट हो गई है। सदमे से नौ किसानों की मौत हो गई है। कई जिलों में किसानों ने आत्महत्या कर ली। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए दैवीय आपदा से प्रभावित किसानों की मदद करनी चाहिए।
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राष्ट्रीय लोकदल और बसपा के सदस्यों ने भी मानकों को शिथिल करते हुए किसानों को सहायता देने तथा राजस्व देयों की वसूली स्थगित करने की मांग की। आजम खां ने विपक्ष को भरोसा दिलाया कि सरकार प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ मानवीय आधार पर भी हर संभव मदद देगी।
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भाजपा के सुरेश खन्ना ने काम रोको प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि 28 फरवरी से बीती रात तक पूरे प्रदेश में बेतहाशा बारिश तथा कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है जिससे रबी की फसल तबाह हो गई है।

राजस्व विभाग पर भी लगाया आरोप

Vidhan sabha session in Uttar Pradesh.

सरकार ने इसका संज्ञान लेकर जिलों से 4 मार्च तक रिपोर्ट जरूर मांगी लेकिन इतनी जल्दी सर्वे संभव नहीं है। सरसरी तौर पर देखकर रिपोर्ट भेज दी गई। राजस्व विभाग ने मानकों से बचने की कोशिश की है।

महोबा, हमीरपुर, हाथरस, उन्नाव, अमेठी आदि जिलों में किसानों की सदमे से हुई मौत और कुछ किसानों द्वारा की गई आत्महत्या का उल्लेख करते हुए खन्ना ने कहा कि 40-50 फीसदी फसलें नष्ट हो गई हैं इसलिए मानकों को शिथिल कर किसानों को सहायता दी जाए।

भाजपा के डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पूर्वांचल किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले हुदहुद से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई और अब बेमौसम बरसात ने रबी की फसल चौपट कर दी।

पूर्वांचल में अलग तरह से मूल्यांकन कराया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तत्काल सहायता मुहैया करा दे और बाद में केंद्र से इसकी प्रतिपूर्ति कराई जाए।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने इसके लिए कहा भी है। इसके लिए केंद्र से आग्रह कर लिया जाए। रालोद के दलवीर सिंह ने कहा कि व्यावहारिक रूप से 80 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है।

भाजपा के धर्मपाल सिंह रालोद के पूरन प्रकाश, बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह व स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई अन्य सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए किसानों को उचित सहायता देने की मांग उठाई।

...और उबल पड़े आजम, कहा घड़ियाली आंसू दिखा रहे भाजपाई

Vidhan sabha session in Uttar Pradesh.

संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि सपा सरकार किसानों की हितैषी है। जहां तक सर्वे का सवाल है तो यह कोई आसमानी किताब नहीं है कि इसमें जो लिख दिया गया वही सही है। जैसे ही नेता सदन आते हैं उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी और आर्थिक सहायता के साथ-साथ मानवीय आधार पर भी जो संभव होगा किया जाएगा।

सरकार के जवाब से असंतुष्ट भाजपा के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए तो आजम ने कहा कि किसानों की सहायता के लिए केंद्र से मदद का आग्रह करने पर ये सहमत नहीं है इसलिए बहिर्गमन कर गए।

प्रश्न प्रहर में जब भाजपा के सदस्य बारिश व ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान को लेकर हंगामा करने लगे तो संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि यह योजनाबद्ध है क्योंकि आज संसद में किसान विरोधी बिल पेश हो रहा है। इससे तय होगा कि भाजपा किसानों की कितनी हितैषी व कितनी विरोधी है।

उसे दबाने के लिए यह सब किया जा रहा है और घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। ये क्या किसानों के लिए करेंगे? किसानों को भूखे मारने की योजना तैयार हो रही है। किसानों की जमीन हड़पने का बिल पेश हो रहा है।

यूपी भाजपा किसानों की हितैषी है तो घोषणा करे कि वह बिल का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि क्या यह सच नहीं है कि गरीब किसानों की जमीन छीनकर अडानी, पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को देने के लिए बिल लाया जा रहा है। सुरेश खन्ना ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि जिस बात का सदन से संबंध नहीं उसका उल्लेख किया जा रहा है।

चलिए ‘किसानभक्ति’ हो गई आपकी

Vidhan sabha session in Uttar Pradesh.

वेल में भाजपा के सदस्य बार-बार बारिश व ओलावृष्टि की बात कह रहे थे। उनका कहना था कि इतने दिन हो गए सरकार ने कुछ नहीं किया। इस पर अध्यक्ष ने उनसे कहा कि चलिये हो गई ‘किसानभक्ति’ आपकी।

क्या बाजार है, जब चाहे जरूरी बात करनी है
प्रश्न प्रहर में अध्यक्ष के कहने के बाद जब भाजपा के सदस्य अपनी सीटों पर चले गए तो बसपा के शमशेर बहादुर उर्फ शेरू ने अध्यक्ष से कहा कि जरूरी बात करनी है। इस पर अध्यक्ष ने सख्त लहजे में कहा- क्या बाजार है जो जब चाहे जरूरी बात करनी है। इसके बाद शेरू चुपचाप बैठ गए।

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