कहीं दंगों की भेंट न चढ़ जाए विधानमंडल सत्र
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अगले सप्ताह से शुरू होने जा रहा विधानमंडल सत्र मुजफ्फरनगर दंगे की भेंट चढ़ सकता है। समूचे विपक्ष ने दोनों सदनों में मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर सरकार को घेरने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है।
ऐसे में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाने की संभावना कम ही नजर आ रही है। माना जा रहा है कि विपक्ष के हमलावर तेवरों से बचने के लिए सरकार का जोर जल्द से जल्द अनुपूरक बजट पास कराने के साथ-साथ अन्य जरूरी विधायी कार्य निपटाने पर रहेगा।
मुजफ्फरनगर दंगे ने प्रदेश का सियासी पारा एकदम से बढ़ा दिया है। इसका असर 16 सितंबर से शुरू हो रहे विधानमंडल सत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है।
हालांकि सत्र संक्षिप्त अवधि के लिए ही बुलाया गया है लेकिन जिस तरह की राजनीतिक सरगर्मियां चल रही हैं, उसे देखते हुए एक-दो दिन भी कार्यवाही ठीक से चल पाने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है। सत्र के शांतिपूर्वक संचालन के लिए मुख्यमंत्री ने 15 सितंबर को सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है।
सदन में मजबूती से रखेंगे अपना पक्ष: वाजपेयी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि दंगों को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे कायम किए जा रहे हैं। निर्दोषों को फंसाया जा रहा है। पार्टी इसे जोरदार ढंग से उठाएगी।
भाजपा विधानमंडल दल के नेता हुकुम सिंह समेत पार्टी के चार विधायक भी दंगा भड़काने के आरोप में नामजद किए गए हैं। फर्जी मुकदमों की वापसी के साथ ही जेल भेजे गए लोगों की रिहाई की मांग को लेकर भाजपा सदन में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
दंगों पर राजनीति करने वालों को करेंगे बेनकाब: मौर्य
नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह असफल है, इसलिए प्रदेश में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। सपा और भाजपा मिले हुए हैं और लोकसभा चुनाव के मद्देेनजर मतों के ध्रुवीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
दंगा पीड़ितों को राहत दिलाने तथा सरकार को कठघरे में खड़ा करने के लिए बसपा सदन में मामले को जोरदार ढंग से उठाएगी। दंगों पर राजनीति करने वालों को बेनकाब किया जाएगा।
विपक्षी दलों को जवाब देने के लिए सरकार तैयार: सीएम
दूसरी तरफ सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने दंगों के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि न्यायिक जांच में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा।
दंगों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सदन में विपक्षी दलों के जवाब के लिए सरकार तैयार है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को तत्काल हटाया गया। बिना देर किए सेना बुला ली गई। इतनी त्वरित कार्रवाई की वजह से ही दंगों पर समय रहते काबू पा लिया गया।
पहले ही दिन उठाएंगे मामला: माथुर
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर का कहना है कि पार्टी सत्र के पहले ही दिन मुजफ्फरनगर दंगे का मामला जोरदार ढंग से उठाएगी। हालात इतने बदतर हो गए कि दंगे को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश में पहली बार गांवों में सेना को लगाना पड़ा।
शासन-प्रशासन दंगों को समय रहते नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। वोट के लिए सपा और भाजपा गंदी राजनीति कर रहे हैं। खनन माफिया, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की उपेक्षा, बदहाल सड़कों, जिला योजना का पैसा जारी न किए जाने जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।