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हिंदू धर्म कोई पद्वति नहीं, जीवन शैली है
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 07 Jul 2014 11:19 AM IST
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बड़े लोगों को विवादों से बचना चाहिए। साईं बाबा पर शंकराचार्य स्वरूपानंद की ओर से की गई टिप्पणी पर हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
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विचार मंच की ओर से आयोजित गोष्ठी में यह बात रचनाकार श्रीराम शुक्ल ने कही। साथ ही कई विद्वजनों ने स्वरूपानंद के बयान पर अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता के तौर पर श्रीराम शुक्ल ने कहा कि समाज में संतुलित दृष्टिकोण से कल्याण होता है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि हिंदू धर्म कोई पूजा-पद्वति नहीं, बल्कि जीवन शैली है।
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नेपाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कृपांशकर मिश्रा ने कहा कि वास्तविक धर्म पीड़ितों की मदद करता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी रामबाबू मिश्रा ने कहा कि हमें भक्त होना चाहिए विभक्त नहीं।
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सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी शंकरलाल जायसवाल ने कहा कि अंतरमन जो कहे, वही मानना चाहिए। साईं बाबा को लेकर विवाद ठीक नहीं है।
हिंदू धर्म में विशिष्ट धाराएं समाहित होती रही हैं। गोष्ठी में राज्य विद्युत परिषद के पूर्व सदस्य ब्रजभूषण जिंदल, मजदूर नेता सर्वेश चंद्र द्विवेदी, सीताराम मणि त्रिपाठी, कृष्णचंद भार्गव, ओमदत्त शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।