अयोध्या में धर्मसभा के लिए बनाया जा रहा 1990 जैसा माहौल, भारी भीड़ उमड़ने की संभावना
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अयोध्या के विवादित परिसर में विराजमान रामलला का भव्य मंदिर कब और कैसे बनेगा इसके लिए 1990 जैसा माहौल बनाया जा रहा है। विहिप एलान कर रही है कि 25 नवंबर को विराट धर्मसभा में रामजन्मभूमि का निर्णायक शंखनाद होगा। खुलेआम ऐसे पर्चे यहां परिक्रमा मेले में आए श्रद्धालुओं के बीच बांटे जा रहे हैं। धर्मसभा में भारी भीड़ इकट्ठा होने की उम्मीद है।
इसमें संवैधानिक मर्यादा और व्यवस्था को ठीक वैसे ही ललकारा जा रहा है, जैसे बाबरी ढांचा ढहाने से पहले माहौल गरमाया गया था। केंद्र व राज्य में भाजपा सरकारें होने से पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट असरदार नहीं दिख रही, सब कुछ बेरोकटोक हो रहा है। वहीं, आम लोगों को चिंता है कि अयोध्या की खुशगवार हुई फिजां को फिर से नजर न लगे।
विश्व हिंदू परिषद विराट धर्म सभा को रामजन्मभूमि का निर्णायक शंखनाद बता रही है। इसको लेकर जन-जन में पत्रक बांटा जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि ‘सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे’। ‘पूज्य संतों और हिंदू समाज की मांग, मंदिर निर्माण का अब एकमेव मार्ग’ व ‘केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए, अब समय आ गया है निर्णायक संघर्ष का’ जैसे वाक्यों के जरिए रामभक्तों का आह्वान किया जा रहा है।
पत्रक में यह भी बताया गया है कि 26 साल से टेंट में विराजमान रामलला अपने भक्तों के पौरुष के पुनर्जागरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। देश-विदेश से पूजित शिलाएं आखिर कब तक प्रभु के भव्य भवन की प्रतीक्षा करेंगी। न्यायालय जनभावनाओं की अनंतकाल तक उपेक्षा नहीं कर सकता। पूज्य संतों का मत मंदिर वहीं बनाएंगे जहां रामलला विराजमान हैं। पत्रक के अंत में पूज्य संतों और हिंदू समाज से मंदिर निर्माण हेतु निर्णायक शंखनाद वाक्य के जरिए सहभागी बनने की अपील की जा रही है।
मंदिर निर्माण की तिथि संत ही तय करेंगे
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि रामजन्नभूमि पर भव्य मंदिर बनाने की तिथि साधु-संत ही तय करेंगे। संतों का मार्गदर्शन मिलते ही विहिप एक क्षण भी देर नहीं लगाएगी। धर्मसभा में फैसला संतों को लेना है। उनके मार्गदर्शन से ही पत्रक तैयार कर बांटा जा रहा है।
'माहौल न खराब करें, जो विकास हो रहा है उसे होने दें'
अयोध्या विवाद के हर क्षण को अपनी आंखों में संजोए बुजुर्ग राम प्रसाद पांडेय कहते हैं कि भव्य मंदिर निर्माण उनका ही नहीं सभी हिंदुओं का स्वप्न है, लेकिन अब इस पर सिर्फ राजनीति हो रही है। भीड़ जुटाकर माहौल खराब करने से अयोध्या का तो नुकसान ही होगा। यह बंद होना चाहिए।
अयोध्या व्यापार मंडल के अध्यक्ष नंद कुमार गुप्त व व्यापारी शैलेंद्र गुप्त कहते हैं कि डेढ़ साल में भाजपा अयोध्या में विकास के लिए कई योजनाएं लाई है। जो अब मूर्त रूप ले रही हैं। मुख्यमंत्री के बार-बार आने व दीपोत्सव से कारोबार को लेकर बेहद उम्दा माहौल बना है। मंदिर के नाम पर राजनीति करने वालों से अनुरोध है कि वो अब बस करें। अयोध्या में विकास हो रहा है, उसे होने दें।
दहशत फैला रही है विहिप
मोहम्मद तौफीक व असलम सिद्दीकी कहते हैं कि बाबरी मस्जिद ढहाने से पहले जैसा माहौल बनाकर विहिप दहशत फैला रही है। लोग पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। जबकि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है तो मंदिर का हल क्यों नहीं निकाल लेते। विहिप के पर्चे संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, फिर भी सब चुप हैं।
देश के कोने-कोने से शामिल होंगे संत धर्माचार्य
विहिप की धर्मसभा में देश के कोने-कोने संत-धर्माचार्य शामिल होंगे। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि सभा में अभी तक शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, हंसदेवाचार्य, रामभद्राचार्य, कृष्णाचार्य, साध्वी ऋतंभरा, युगपुरुष स्वामी परमानंद, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद, आर्य समाज के स्वामी विवेकानंद सहित सुब्रहमण्यम स्वामी, विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार सहित संघ के सह सर कार्यवाहक दत्तात्रय होसबोले के भी पहुंचने की संभावना है।