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जुगाड़ की क्रेन से नो पार्किंग जोन से उठा रहे गाड़ियां
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नगर निगम, यातायात पुलिस एवं संभागीय परिवहन के अफसरों की सरपरस्ती में क्रेन ठेकेदार के कारिंदे
ऐसी क्रेन से वाहन उठा रहे हैं जो खुद चलने लायक नहीं हैं। इन्हें जब्त हो जाना चाहिए। न तो इनकी फिटनेस है न प्रदूषण जांच।
हद तो ये कि इन्हें अवैध रूप से मॉडिफाइड भी कर दिया गया है। इसके बावजूद ये धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं, क्योंकि नियमों के रखवाले ही इनके पहरेदार बने हुए हैं।
नो पार्किंग जोन से वाहन उठाने वाली अधिकतर क्रेनों को जेसीबी एवं ट्रैक्टर के मूल स्वरूप में बदलाव कर तैयार किया गया है। यह सीधे तौर पर केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है।
परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते ने इन क्रेनों के प्रदूषण स्तर की जांच करने की पहल भी नहीं की, जो आम आदमी की गाड़ी की चेकिंग कर 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूलते हैं।
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पंजीयन जेसीबी में, स्वरूप क्रेन का
लखनऊ सहित आसपास के संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों की साठगांठ से जुगाड़ की क्र्रेनों का पंजीयन कराया गया है। आरटीओ सूत्रों ने बताया कि अफसराें ने मोटी रकम लेकर जेसीबी का भौतिक सत्यापन किए बिना ही पंजीयन कर दिया है, जबकि आरटीओ में जिस जेसीबी का पंजीयन हुआ, वह बदले स्वरूप में क्रेन बन चुकी थी।
वाहन के मूल स्वरूप में बदलाव अवैध
परिवहन विभाग मुख्यालय के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (तकनीकी) कमल जोशी के मुताबिक केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम मेें दर्ज है कि किसी भी गाड़ी के मूल स्वरूप में बिना अनुमति के बदलाव करना अवैध है। ऐसी गाड़ी अवैध श्रेणी में आ जाती हैं। आरटीओ से अनुमति लेकर सिर्फ गाड़ी का रंग बदल सकते हैं और फ्यूल किट (डीजल-पेट्रोल वाहन में सीएनजी किट) लगवा सकते हैं।
नगर निगम की क्रेन का फिटनेस नहीं
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित फिटनेस सेंटर के संभागीय निरीक्षक जयसिंह ने बताया कि नगर निगम की एक भी क्रेन का अब तक फिटनेस नहीं हुआ है। मूल रूप से उन्हीं क्रेनों का फिटनेस हुआ, जिनके स्वरूप (जेसीबी से क्रेन नहीं बनाया) में बदलाव नहीं किया गया था। जय सिंह ने ये भी स्पष्ट किया कि नो पार्किंग जोन से गाड़ियों को उठाने वाली क्रेनों का फिटनेस नहीं किया गया है।
जेसीबी से बनी क्रेन का पंजीयन नहीं
मेरे कार्यकाल में ऐसी किसी क्रेन का पंजीयन नहीं हुआ है, जिसको जेसीबी के मूल स्वरूप में बदलाव करके तैयार किया गया हो। जो क्रेनें पंजीकृत हैं उनका पंजीयन पूर्व में किया गया होगा। फिर पूरे मामले की छानबीन कराएंगे।
- अखिलेश द्विवेदी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) लखनऊ
किस कमी पर कितना जुर्माना :
प्रदूषण जांच नहीं 10,000
पंजीयन शर्त उल्लंघन 5000
फिटनेस नहीं 5000
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ऐसी क्रेन से वाहन उठा रहे हैं जो खुद चलने लायक नहीं हैं। इन्हें जब्त हो जाना चाहिए। न तो इनकी फिटनेस है न प्रदूषण जांच।
हद तो ये कि इन्हें अवैध रूप से मॉडिफाइड भी कर दिया गया है। इसके बावजूद ये धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं, क्योंकि नियमों के रखवाले ही इनके पहरेदार बने हुए हैं।
नो पार्किंग जोन से वाहन उठाने वाली अधिकतर क्रेनों को जेसीबी एवं ट्रैक्टर के मूल स्वरूप में बदलाव कर तैयार किया गया है। यह सीधे तौर पर केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है।
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परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते ने इन क्रेनों के प्रदूषण स्तर की जांच करने की पहल भी नहीं की, जो आम आदमी की गाड़ी की चेकिंग कर 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूलते हैं।
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पंजीयन जेसीबी में, स्वरूप क्रेन का
लखनऊ सहित आसपास के संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों की साठगांठ से जुगाड़ की क्र्रेनों का पंजीयन कराया गया है। आरटीओ सूत्रों ने बताया कि अफसराें ने मोटी रकम लेकर जेसीबी का भौतिक सत्यापन किए बिना ही पंजीयन कर दिया है, जबकि आरटीओ में जिस जेसीबी का पंजीयन हुआ, वह बदले स्वरूप में क्रेन बन चुकी थी।
वाहन के मूल स्वरूप में बदलाव अवैध
परिवहन विभाग मुख्यालय के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (तकनीकी) कमल जोशी के मुताबिक केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम मेें दर्ज है कि किसी भी गाड़ी के मूल स्वरूप में बिना अनुमति के बदलाव करना अवैध है। ऐसी गाड़ी अवैध श्रेणी में आ जाती हैं। आरटीओ से अनुमति लेकर सिर्फ गाड़ी का रंग बदल सकते हैं और फ्यूल किट (डीजल-पेट्रोल वाहन में सीएनजी किट) लगवा सकते हैं।
नगर निगम की क्रेन का फिटनेस नहीं
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित फिटनेस सेंटर के संभागीय निरीक्षक जयसिंह ने बताया कि नगर निगम की एक भी क्रेन का अब तक फिटनेस नहीं हुआ है। मूल रूप से उन्हीं क्रेनों का फिटनेस हुआ, जिनके स्वरूप (जेसीबी से क्रेन नहीं बनाया) में बदलाव नहीं किया गया था। जय सिंह ने ये भी स्पष्ट किया कि नो पार्किंग जोन से गाड़ियों को उठाने वाली क्रेनों का फिटनेस नहीं किया गया है।
जेसीबी से बनी क्रेन का पंजीयन नहीं
मेरे कार्यकाल में ऐसी किसी क्रेन का पंजीयन नहीं हुआ है, जिसको जेसीबी के मूल स्वरूप में बदलाव करके तैयार किया गया हो। जो क्रेनें पंजीकृत हैं उनका पंजीयन पूर्व में किया गया होगा। फिर पूरे मामले की छानबीन कराएंगे।
- अखिलेश द्विवेदी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) लखनऊ
किस कमी पर कितना जुर्माना :
प्रदूषण जांच नहीं 10,000
पंजीयन शर्त उल्लंघन 5000
फिटनेस नहीं 5000