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बीएड कॉलेजों में बेकार चली गईं 617 सीटें
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Fri, 18 Oct 2013 10:26 PM IST
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बीएड के प्रति अभ्यर्थियों का क्रेज घटता जा रहा है। आलम यह है कि इस बार बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2013 की फर्स्ट काउंसलिंग के बाद प्रदेश भर में बीएड के सरकारी व अनुदानित कॉलेजों की 617 सीटें खाली रह गईं।
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अधिकारियों ने सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की सीटों को भरने के लिए तो पूरी जोर आजमाइश की लेकिन सरकारी कॉलेजों की सीटों को भरने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
यदि इन सीटों को भरने के लिए शासन स्तर से कोई योजना बनाई जाती तो अभ्यर्थियों को बहुत कम शुल्क पर बीएड करने का मौका मिलता।
बीएड की इन 617 सीटों में 25 से अधिक सीटें लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की हैं। इस बार बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को दी गई थी।
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जानकारी के अनुसार सरकारी व अनुदानित कॉलेजों की 229 सीटें ऐसी थी जिन पर फर्स्ट काउंसलिंग के बाद आवंटन नहीं हुआ।
इसके अतिरिक्त 388 सीटें ऐसी थीं जिन पर आवंटन तो हुआ लेकिन अभ्यर्थी प्रवेश लेने कॉलेज नहीं पहुंचे। इस तरह से कुल 617 सीटें खाली रह गईं।
इन खाली सीटों में लखनऊ के केकेसी, नवयुग कन्या महाविद्यालय और महिला महाविद्यालय की सीटें शामिल हैं।
वहीं फर्स्ट काउंसलिंग के बाद सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की बची सीटों को पूल काउंसलिंग से भरा गया। इसके बाद खाली सीटों को कॉलेजों ने विज्ञापन निकालकर भरा। लेकिन सरकारी व अनुदानित कॉलेजों की सीटों को भरने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
छात्रों को मिल सकती थी बड़ी राहत
सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में बीएड का शुल्क 51,250 रुपये से लेकर 72000 रुपये तक है। जबकि सरकारी व अनुदानित कॉलेजों से अभ्यर्थी केवल एक से पांच हजार रुपये फीस तक में बीएड की पूरी पढ़ाई कर लेता है।
अगर इन सीटों को भरने का प्रयास किया जाता तो 617 अभ्यर्थियों को लाभ होता। कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने सेल्फ फाइनेंस का शुल्क वहन न करने के चलते बीएड नहीं किया।
वहीं कई अभ्यर्थियों ने सरकारी व एडेड कॉलेजों में एडमिशन न मिलने पर मजबूरी में सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में दाखिला लिया।
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