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बेनी के टिकट पर सवाल खड़ा कर गए पुनिया
राजेंद्र सिंह/लखनऊ
Updated Thu, 24 Oct 2013 09:36 AM IST
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद विस्थापित दलितों को कैंपों में सरकारी सुविधाएं नहीं दी गईं।
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हिंसा के बाद वे डरे हुए हैं और कैंपों से बाहर नहीं जा रहे। आयोग ने प्रदेश सरकार से हिंसा के बाद दलितों की सुरक्षा के लिए एक्शन और कार्ययोजना की जानकारी मांगी है।
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दूसरी बार आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पुनिया पहली बार बुधवार को राजधानी पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से रू-ब-रू हुए।
उन्होंने कहा, वे आयोग की टीम के साथ मुजफ्फरनगर के गांवों से पलायन करने वाले दलितों के कैंपों में गए थे।
रविदास मंदिर स्थित कैंप में ऐसे गांवों से पलायन करने वाले लोग रह रहे हैं, जहां दूसरे वर्ग की बहुतायत है और दलितों की आबादी बहुत कम है।
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उस कैंप में रह रहे लोगों में भय व्याप्त था। कैंप में एक महिला की डिलीवरी भी हुई। वहां प्रशासन की ओर से न खाने की व्यवस्था है और न ही चिकित्सा की।
एक बच्चे का हाथ टूटा हुआ था, जिसका इलाज नहीं हुआ। इन राहत शिविरों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। वहां राहत टीमें भी नहीं भेजी गईं।
आयोग ने प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजकर पूछा है कि दलितों के राहत कैंपों, उनकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई और आगे क्या कार्ययोजना है?
दलितों योजनाओं की समीक्षा शीघ्र
एक सवाल के जवाब में पुनिया ने कहा कि प्रदेश सरकार घोषित रूप से दलित विरोधी है। संविधान में प्रावधान होने के बावजूद वह प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रही है।
जल्द ही आयोग प्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए चलाई जा रही योजनाओं और आरक्षण की समीक्षा करेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार को लिखा गया गया है।
इससे पहले बसपा सरकार में समीक्षा करने का कार्यक्रम दिया गया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक ही नहीं होने दी।
यह पहला मौका था जब किसी राज्य सरकार ने समीक्षा बैठक पर रोक लगाई। गुजरात सरकार तक ने समीक्षा के दौरान आयोग के सुझावों को माना और उन पर अमल भी किया।
उन्होंने कहा कि दलितों से कुछ योजनाओं के मानक बदलने का मुद्दा भी बैठक में उठेगा। योजना आयोग की अनुमति के बिना मानक नहीं बदले जा सकते।
बेनी से नाराजगी नहीं
पुनिया ने एक सवाल के जवाब में कहा कि केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा से उनकी कोई नाराजगी नहीं है। वे उनका सम्मान करते हैं। मुलाकात में उन्होंने भी कभी नाराजगी नहीं जताई।
उनका टिकट कटने संबंधी बेनी प्रसाद के बयान पर पुनिया ने सीधे तौर पर टिप्पणी नहीं की। कहा, वे बाराबंकी के सांसद हैं और अपना काम कर रहे हैं।
टिकट देना सोनिया, राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व का काम है। जिसे टिकट मिलेगा, वही चुनाव लड़ेगा। बेनी से पार्टी को नुकसान संबंधी सवाल पर कहा कि इसके बारे में निर्मल खत्री या राहुल गांधी से पूछिये।
खुद को दलित चेहरा नहीं मानता
अनुसूचित जाति आयोग का दुबारा चेयरमैन बनाकर पार्टी क्या उन्हें दलित चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है? पुनिया ने कहा, मैं खुद को दलित चेहरा नहीं मानता। सिर्फ पीएल पुनिया मानता हूं। पार्टी मुझे फिर से जिम्मेदारी देकर क्या समझती है, यह उसकी राय है।
मायावती के अलावा कोई दलित नेता नहीं
पुनिया ने राहुल गांधी के इस बयान से सहमति जताई कि मायावती बसपा में दलित नेतृत्व को नहीं उभरने देतीं। उन्होंने कहा, आप मायावती से पूछिए, वह दूसरी पंक्ति के किसी किसी भी दलित नेता का नाम नहीं बताएंगी।
वह किसी को आगे बढ़ने ही नहीं देती हैं। उन्होंने पिछली सरकार में वित्तमंत्री केके गौतम को बजट सत्र से दो दिन पहले सिर्फ इसलिए हटा दिया था कि उनके रहते कोई दूसरा दलित नेता बजट कैसे पेश करेगा?
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