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कोयले की कमी: यूपी अपने प्लांट बंद कर महंगी बिजली खरीदने को मजबूर, जल्द हालात सुधरने के आसार नहीं
Wed, 20 Oct 2021 01:51 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 20 Oct 2021 01:51 PM IST
सार
यूपी में कोयले की कमी के चलते हालात जल्द सुधरने के आसार नहीं हैं। प्रदेश को महंगी बिजली खरदनी पड़ रही है। अब बिजली आपूर्ति पटरी पर रखने को एनर्जी एक्सचेंज ही सहारा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : social media
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विस्तार
बारिश के कारण पारा लुढ़कने से उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग घटकर 15,000 मेगावाट से नीचे पहुंच गई है, लेकिन कोयले की कमी की वजह से राज्य विद्युत उत्पादन निगम की 325 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को बंद करना पड़ा है। वहीं, 1292 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को रिजर्व शटडाउन (बिजली की आवश्यकता न होने पर बंद किया जाना) में रखा गया है। ऐसे में बिजली का इंतजाम करना पावर कॉर्पोरेशन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं, कोयला संकट बरकरार रहने से जल्द हालात सुधरने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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उत्पादन निगम के सूत्रों का कहना है कि रिजर्व शटडाउट तो महज बहाना है। कोयले की कमी की वजह से इकाइयां बंद करनी पड़ी हैं। पर, सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि सस्ती बिजली देने वाली प्रदेश की तापीय इकाइयों को रिजर्व शटडाउन के नाम पर बंद करके एनर्जी एक्सचेंज से दो-तीन गुना महंगी बिजली खरीदने का क्या औचित्य है?गौरतलब है कि शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति करने के लिए सोमवार को लगभग 1.40 करोड़ यूनिट बिजली एक्सचेंज से खरीदी गई थी।
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स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अधिकारियों के अनुसार निजी क्षेत्र की 1855 मेगावाट क्षमता की इकाइयां कोयले की कमी से बंद हैं। जबकि 80 मेगावाट की इकाइयां रिजर्व शटडाउन में हैं। इसी तरह एनटीपीसी की 390 मेगावाट क्षमता की इकाइयां कोयले की कमी के कारण बंद हैं जबकि 200 मेगावाट क्षमता की इकाइयां रिजर्व शटडाउन में हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम के हरदुआगंज व पारीछा बिजलीघर में कोयला नहीं है। जबकि अनपरा व ओबरा में दो-तीन दिन का स्टॉक ही बचा है। एनटीपीसी व निजी क्षेत्र के बिजलीघरों में भी कोयले का पर्याप्त स्टॉक नहीं है।