खस्ताहाल, लेकिन सबसे महंगी है यूपी की बिजली
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उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियां अपने घाटे का हवाला देते हुए बिजली के दाम बढ़ाने की एक बार फिर वकालत कर रही हैं।
लेकिन बिजली कंपनियां इस तथ्य को छुपा जाती हैं कि उत्तर प्रदेश की बिजली पहले से ही पड़ोसी राज्यों से काफी महंगी है।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार व मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल रही है।
एक तरफ तो प्रदेश की बिजली कंपनियां अन्य राज्यों की तुलना में पहले से ही काफी अधिक दाम वसूल रही हैं ऊपर से सप्लाई की भी हालत अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी खस्ता है।
मांग और पूर्ति में भारी अंतर
अगर अप्रैल में बिजली की अधिकतम मांग व उपलब्धता को देखें तो यह मांग की तुलना में 22.4 फीसदी कम रही। इन सबके बावजूद प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
वहीं, यूपी की तुलना में पहले से ही काफी सस्ती बिजली मुहैया करा रहे उत्तराखंड ने इस साल दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। बिहार में दो किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को दो रुपये से लेकर 2.70 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली मिल रही है।
छत्तीसगढ़ व झारखंड में भी बिजली की दरें काफी सुकून देने वाली हैं। हिमाचल प्रदेश में तो बिजली की दरें सबसे कम हैं।
केवल दिल्ली व हरियाणा ही दो ऐसे राज्य हैं जिनकी बिजली अपेक्षाकृत थोड़ी महंगी है। हालांकि, हरियाणा 100 यूनिट महीने तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराता है।
तो बढ़ जाएगी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी व सरचार्ज
अगर बिजली का टैरिफ बढ़ता है तो उपभोक्ताओं पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी व सरचार्ज का बोझ और बढ़ जाएगा।
प्रदेश सरकार पहले से ही कुल बिल का पांच प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लेती है। इसके साथ ही 2.84 फीसदी रेग्युलेटरी सरचार्ज भी उपभोक्ताओं को देना होगा।
सरचार्ज भी कुल बिल पर लगता है। यानी टैरिफ महंगा होगा तो इन मदों में भी उपभोक्ताओं को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।
होता है खेल
इस मुद्दे पर पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व वाणिज्य निदेशक उदय नारायण का कहना है कि बिजली कंपनियां जानबूझकर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) में खेल करती हैं। आमदनी कम और खर्चें अनाप-शनाप दिखाती हैं।
कायदे से नियामक आयोग को तब तक एआरआर स्वीकार नहीं करना चाहिए जब तक कंपनियां आमदनी व खर्चे की ऑडिटेड रिपोर्ट न दे दें।
उदय नारायण का कहना है कि दरअसल कंपनियां अपनी नाकामियों का ठीकरा उपभोक्ताओं पर मढ़ देती हैं। महंगी बिजली खरीद के पीछे भी भ्रष्टाचार छुपा हुआ है। इन्हें अगर दुरुस्त कर लें तो बिजली की कीमतें काफी कम हो सकती हैं।
सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए
इस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि यह बात बिल्कुल सही है कि यूपी में बिजली सबसे महंगी है और ऊपर से यहां सप्लाई की हालत भी बेहद खराब है। सप्लाई के मामले में बिहार, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु व गुजरात हमसे बेहतर हैं।
सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर बढ़ोतरी का प्रस्ताव वापस लेने की पहल करनी चाहिए। इस मामले में बिजली निगम के आला अफसर मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं।
जानिए कहां कितनी है घरेलू बिजली की दरें
यूपी
200 यूनिट तक-4.00 रुपये
201 से 500 तक-4.50 रुपये
500 से अधिक-5.00 रुपये
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और बिहार में बिजली दरें
उत्तराखंड
1-100 यूनिट तक-2.30 रुपये
101 से 200 यूनिट-2.70 रुपये
201 से 400 यूनिट-3.35 रुपये
400 से अधिक-3.50 रुपये
हिमाचल प्रदेश
1 से 125 यूनिट तक-1.30 रुपये
126 से 250 तक-2.70 रुपये
251 से अधिक-3.95 रुपये
बिहार
1 से 50 यूनिट तक-2.00 रुपये
51 से 100 यूनिट-2.30 रुपये
101 से अधिक-2.70 रुपये
छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश की बिजली दरें
छत्तीसगढ़
1 से 100 यूनिट तक-2.10 रुपये
101 से 200 यूनिट-2.40 रुपये
201 से 500 तक-3.40 रुपये
झारखंड
1 से 200 यूनिट तक-2.40 रुपये
201 से अधिक-2.90 रुपये
मध्य प्रदेश
1 से 50 यूनिट तक-3.40 रुपये
51 से 100 यूनिट-3.85 रुपये
101 से 300 तक-4.8 रुपये
लेकिन यहां है महंगी बिजली
1 से 200 यूनिट तक-3.90 रुपये
201 से 400 तक-5.80 रुपये
401 से 800 तक-6.80 रुपये
हरियाणा
1 से 250 यूनिट तक-4.90 रुपये
251 से 500 तक-5.60 रुपये
501 से 800 तक-5.98
(सभी प्रदेशों की दरें वर्ष 2013-14 की हैं। उत्तराखंड को छोड़कर अभी कहीं नई दरें नहीं आई हैं।)