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यूपी में 'लव जिहाद' और धर्मांतरण रोकने का कानून लागू

Sat, 28 Nov 2020 10:40 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 28 Nov 2020 10:40 AM IST
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Uttar Pradesh Governor promulgates UP Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Ordinance 2020
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा प्रस्तावित धर्मांतरण संबंधी अध्यादेश को शनिवार को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के मसौदे को राज्यपाल से अनुमोदन के लिए बुधवार को राजभवन भेजा गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस अध्यादेश के मसौदे को राज्यपाल के पास भेजा गया था। 

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अब राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही यह अध्यादेश के रूप में यूपी में लागू हो गया है। अब इस अध्यादेश को छह माह के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।
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बता दें कि योगी सरकार झूठ बोलकर, झांसा देकर या छल-प्रपंच कर धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए यह अध्यादेश लाई है। इसके लागू होने के बाद झांसा देकर, झूठ बोलकर या छल-प्रपंच करके धर्म परिवर्तन करने-कराने वालों के साथ सरकार सख्ती से पेश आएगी।
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अगर सिर्फ शादी के लिए लड़की का धर्म बदला गया तो ऐसी शादी न केवल अमान्य घोषित कर दी जाएगी, बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वालों को 10 साल तक जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।

राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून प्रभावी हो गया है और अब ऐसा अपराध गैर जमानती माना जाएगा। अध्यादेश के अनुसार किसी एक धर्म से अन्य धर्म में लड़की का धर्म परिवर्तन सिर्फ एकमात्र प्रयोजन शादी के लिए किया जाता है तो ऐसा विवाह शून्य (अमान्य) की श्रेणी में लाया जा सकेगा।

अध्यादेश के अनुसार एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए संबंधित पक्षों को विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से है। संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उन पर कहीं भी, किसी भी तरह का कोई प्रलोभन या दबाव नहीं है। 

अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के सभी पहलुओं पर प्रावधान तय किए गए हैं। इसके अनुसार धर्म परिवर्तन का इच्छुक होने पर संबंधित पक्षों को तय प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। इस अपराध में न्यूनतम जुर्माना 10,000 रुपये तय किया गया है।

दबाव डालकर या झूठ बोलकर अथवा किसी अन्य कपट पूर्ण ढंग से अगर धर्म परिवर्तन कराया गया तो यह एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

यह गैर जमानती होगा और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा चलेगा। दोष सिद्ध हुआ तो दोषी को कम से कम 01 वर्ष और अधिकतम 05 वर्ष की सजा भुगतनी होगी। साथ ही कम से कम 15,000 रुपए का जुर्माना भी भरना होगा।

अगर धर्म परिवतर्न का मामला अवयस्क महिला, अनूसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के संबंध में हुआ तो दोषी को तीन वर्ष से 10 वर्ष तक कारावास की सजा और न्यूनतम 25,000 जुर्माना अदा करना पड़ेगा।

धर्म परिवर्तन कराने वाले को देने होंगे सुबूत

धर्म परिवर्तन किसी प्रलोभन, जोर-जबर्दस्ती, तत्काल प्रभाव, उत्पीड़न और विवाह के लिए नहीं किया गया है, इसके सुबूत धर्म परिवर्तन कराने वाले को देने होंगे। धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेस्ट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर 6 माह से तीन साल तक की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी का कहना है कि प्रदेश में इस कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा।
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