यूपी में बनेगा निवेश का माहौल, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का गठन, योगी होंगे अध्यक्ष
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यूपी में औद्योगिक माहौल बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें कई प्रतिष्ठित उद्योगपतियों को शामिल किया गया है। बोर्ड औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के संबंध में तेजी से निर्णय लेने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही निवेशकों में ‘ब्रांड’ और ‘निवेश गंतव्य’ के रूप में प्रदेश को स्थापित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। बोर्ड का गठन पांच वर्ष के लिए हुआ है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नई औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति में इस बोर्ड के गठन का एलान किया था। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय ने बोर्ड के गठन का आदेश जारी कर दिया है। बोर्ड प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल वातावरण तैयार करने, सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण, सेवायोजन के अवसरों में वृद्धि के लिए श्रम कानूनों को सहज बनाने के प्रयासों में मार्गदर्शन देगा।
बोर्ड में औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना को उपाध्यक्ष व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को सदस्य बनाया गया है। इनके अलावा बोर्ड में 11 प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि हैं। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त इस बोर्ड के सदस्य संयोजक हैं।
बोर्ड के गैर सरकारी सभी सदस्य अवैतनिक होंगे। बोर्ड में कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, वित्त, ऊर्जा, राजस्व, वाणिज्य कर, गृह व अग्निशमन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव व पिकप के प्रबंध निदेशक को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। बोर्ड विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में अन्य अधिकारियों को शामिल कर सकेगा।
बोर्ड में ये उद्योगपति हुए शामिल
पंकज पटेल, जाइडिस कैडिला
कुलीन लाल भाई, अरविंद मिल्स
अजय श्रीराम, डीसीएम श्रीराम ग्रुप
यूएस. भरतिया, चेयरमैन इंडिया ग्लाइकोल लि.,
तरुन साहनी, त्रिवेनी ग्रुप
ललित खेतान, रेडिको खेतान
शिशिर जयपुरिया, एमडी गिन्नी फिलामेंट्स
समीर गुप्ता, जैक्शन ग्रुप
जगदीश खट्टर, कारनेशन ऑटो
एलके झुनझुनवाला, चेयरमैन केएम शुगर मिल्स लि. लखनऊ
विनय कुमार, चेयरमैन बनारस होटल ग्रुप
पिकप में होगा बोर्ड का सचिवालय
राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की गतिविधियों के संचालन के लिए ‘द प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ यूपी लि.’ (पिकप) में सचिवालय होगा। यह मेगा परियोजनाओं से संबंधित प्राप्त प्रस्तावों का एजेंडा तैयार कर बोर्ड के सामने रखने, बोर्ड की संस्तुतियों, उद्योगों की सहायता के लिए हेल्पडेस्क, मेगा परियोजना के संबंध में आने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए सरकारी विभागों से समन्वय व बोर्ड के निर्देश पर जरूरत के हिसाब से निजी परामर्शी संस्थाओं के चयन का काम करेगा। बोर्ड के खर्च के लिए सरकार बजट की व्यवस्था करेगी। इस रकम की व्यवस्था उद्योग विभाग के बजट से होगी।
यह होंगे राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के मुख्य काम
- औद्योगिक वातावरण बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास के ट्रेंड्स के साथ इस दिशा में आवश्यक सुधार।
प्रदेश को निवेशकों के बीच ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए निजी परामर्शी या किसी शिक्षण संस्थान के जरिए अध्ययन कराएगा।
-निवेश को सुगम बनाने के लिए परियोजनाओं की स्थापना में सहयोग देने के लिए आवश्यक नीतिगत मुद्दों पर मार्गदर्शन।
-औद्योगिक विकास विभाग के अंतर्गत तैयार की जाने वाली क्षेत्र विशिष्ट की नीतियों पर विचार-विमर्श कर निर्णय लेना।
- स्थानीय क्षेत्रों के औद्योगीकरण सहित आर्थिक विकास पर दिशानिर्देश।
- क्षेत्र विशिष्ट व सेक्टरवार निवेश आकर्षित करने के लिए रणनीति बनाने में मार्गदर्शन देना।
- राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के आयोजन तथा भावी निवेशकों से संपर्क के लिए आवश्यकता अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट।
- प्रदेश को एक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए निवेशकों व विभिन्न सरकारी विभागों के बीच इंटरफेस की भूमिका।
- निवेश के लिए उद्योगों के साथ आवश्यकता अनुसार एमओयू कराना व उनके क्रियान्वयन की सलाह।
- मेगा परियोजनाओं को दी जाने वाली सुविधाओं व रियायतों पर दिशानिर्देश।
-औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना में आने वाली समस्याओं का तेजी से निस्तारण।