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यूपीकोका समेत तीन विधेयकों को राज्यपाल ने भेजा राष्ट्रपति के पास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:49 AM IST
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राज्यपाल राम नाईक ने राज्य विधानमंडल से पारित यूपीकोका, राजस्व संहिता संशोधन और श्रम विभाग से जुड़े एक-एक विधेयक को राष्ट्रपति को विचार के लिए भेजने का फैसला किया है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद ही ये अमल में आ सकेंगे।
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योगी सरकार ने प्रदेश में संगठित अपराधों पर अंकुश के लिए सख्त प्रावधानों वाला यूपी संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक-2017 (यूपीकोका) विधानमंडल से पारित कराया है।
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इसमें संपत्ति की कुर्की, रिमांड और अपराध नियंत्रण संबंधी प्रक्रिया, त्वरित विचारण व न्याय के लिए विशेष न्यायालयों, विशेष अभियोजकों और संगठित अपराध के खतरे को नियंत्रित करने की अनुसंधान संबंधी प्रक्रियाओं सहित कड़े प्रावधान शामिल हैं।
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यूपी राजस्व संहिता संशोधन विधेयक-2018 में प्रदेश के औद्योगीकरण और कृषि विकास के लिए भूमि उपलब्धता सुगम बनाने के लिहाज से कई उपाय किए गए हैं। कृषि जोतों के उत्तराधिकार से संबंधित विषयों में परिवर्तन के लिए पूर्व में स्थापित यूपी राजस्व संहिता-2006 में संशोधन किया गया है।
तीसरा विधेयक श्रम विभाग का है। अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन एवं विनियमन और सेवा शर्त) (यूपी संशोधन) विधेयक 2018 के जरिए 2017 में बनाए गए अधिनियम में संशोधन किया गया है।
पूर्व में विधानमंडल से पारित इस विधेयक को राज्यपाल ने राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया था। केंद्र ने उस विधेयक में कुछेक संशोधन की संस्तुति की थी। प्रदेश सरकार ने पूर्व में पारित विधेयक को वापस लेकर संशोधन विधेयक-2018 को विधानमंडल से पारित कराकर राज्यपाल को भेजा था।
राजभवन के प्रवक्ता ने बताया कि इन तीनों ही विधेयकों के प्रावधानों पर राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक है। इसके लिए विधेयकों को आरक्षित कर लिया गया है।