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UP: मतदाता सूची में वोटरों का पता गलत होना सामान्य बात... आयोग ने दिए सुधार के निर्देश, सपा ने उठाए थे सवाल
Fri, 16 Jan 2026 01:37 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:37 PM IST
सार
यूपी के राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में वोटरों का गलत पता दर्ज होने पर जवाब दिया है। आयोग ने कहा कि यह एसआईआर की वजह से नहीं है। दशकों से यह स्थिति बनी हुई है।
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राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा
- फोटो : ANI
विस्तार
यूपी के राज्य निर्वाचन आयोग ने समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मतदाता सूची में वोटरों का पता गलत होना एक सामान्य बात है और यह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण बिल्कुल नहीं है। आयोग ने बीएलओ को मतदाताओं के पते में सुधार का निर्देश दिया है।
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आयोग ने एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में विभिन्न असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने मकान नंबर एक जैसा आ जाना एक बहुत आम सी गलती है जो सारी विधानसभाओं के बहुत सारे मतदान केंद्रों कि वोटरलिस्टों में विद्यमान है। यह असंतोषजनक स्थिति एसआईआर की वजह से उत्पन्न नहीं हुई है क्योंकि एसआईआर के गणना चरण में वोटर लिस्ट में वोटर के किसी भी विवरण को संशोधित नहीं किया गया है बल्कि यह स्थिति तो दशकों से चली रही है।
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ऐसी गलतियां कई कारणों से होती हैं जिनमें एक प्रमुख कारण यह है कि सारे गांवों में किसी भी मकान का और शहरों में बहुत से मकानों का कोई नंबर नहीं होता इसलिए गांवों में वोटरलिस्ट में उस वोटर के नाम के सामने एक नोशनल (काल्पनिक नंबर) दिया जाता है इसलिए शहरों में बहुत से वोटरों के नाम के सामने मकान नंबर के स्थान पर 0 (जीरो) अथवा 00 (डबल जीरो) लिखा जाना एक आम चलन है। शहरों में वार्ड वार टैक्स कलेक्शन की दृष्टि से वार्ड के मकानों को एक रजिस्टर में नोशनल नंबर दिया जाता है। रामपुर जिले में मिलक नगर पालिका में ऐसा ही एक मामला सामने आया जब दो विभिन्न परिवारों का मकान नंबर विधानसभा की वोटर लिस्ट में एक जैसा पाया गया जिसे एक समाचार पत्र ने प्रमुखता से छापा।
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दोनों परिवार नगरपालिका के अलग-अलग वार्डों में रहते हैं परंतु परिवारों के वॉर्ड रजिस्टरों में लिखें नोशनल मकान नंबर एक जैसे हैं। विधानसभा की वोटर लिस्ट में दोनों परिवारों के वोट एक ही बूथ पर दर्ज है। उस भाग का केवल एक ही अनुभाग बना था और मकान नंबर के साथ वार्ड नंबर अंकित नहीं था इसलिए दोनों परिवारों के मकान नंबर एक समान दिख रहे हैं।
वोटर लिस्ट के भागों को सही प्रकार से पर्याप्त संख्या में सही अनुभागों में ना बांटा जाना इस विसंगति का एक कारण बना। अब इस संतोषजनक स्थिति को सुधारने के लिए सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी पोलिंग स्टेशनों के मतदान क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में वेल डिमार्केटेड अनुभाग बनाये जाएं जिससे न केवल बीएलओ को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के समय और चुनाव के समय मतदाता पर्ची बांटने के लिए वोटरों को ढूंढने में आसानी होगी बल्कि असंबंधित लोगों के मकान नंबर वोटर लिस्ट में एक समान आने की समस्या से भी कुछ हद तक निजात मिलेगी। डेटाबेस में मकान नंबर दर्ज करते समय उसके साथ संबंधित गली मोहल्ले अथवा सड़क का नाम भी दर्ज किया जाए जिससे मकान नंबर पढ़ते ही यह स्पष्ट हो जाए कि यह मकान किस इलाके में पड़ता है। बीएलओ सुपरवाइजरों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वो अपने क्षेत्र के सारे बूथों की वोटर लिस्टों को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस तरह की त्रुटियों को चिह्नित कर समय रहते उनको दुरुस्त करा लें जिससे अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो तो उसमें ऐसी कोई गलती न रहे।
आयोग ने एक्स पर दिया ये जवाब
वोटर लिस्ट में विभिन्न असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने मकान नंबर एक जैसा आ जाना एक बहुत आम सी गलती है जो सारी विधानसभाओं के बहुत सारे मतदान केंद्रों कि वोटरलिस्टों में विद्यमान् है। यह असंतोषजनक स्थिति SIR की वजह से उत्पन्न नहीं हुई है क्योंकि SIR के गणना चरण में वोटर लिस्ट… https://t.co/LBrA6shw8i
— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) January 15, 2026
समाजवादी पार्टी ने वोटरों की संख्या कम होने पर और मतदाताओं का गलत पता दर्ज होने को लेकर सवाल उठाए थे जिस पर आयोग ने जवाब दिया है।