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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Will Panchayat elections be held this month? HC states the tenure of Panchayats cannot be extended beyond

UP: क्या अब इस महीने में होंगे पंचायत चुनाव, HC ने कहा- पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ा सकते

Sat, 27 Jun 2026 09:12 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 27 Jun 2026 09:12 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक बढ़ाने पर रोक लगाते हुए सरकार से 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने को कहा है। अदालत ने प्रशासक नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। सरकार ने आरक्षण निर्धारण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार होने की दलील दी।

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UP: Will Panchayat elections be held this month? HC states the tenure of Panchayats cannot be extended beyond
lawyer advocate and court - फोटो : adobestock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के खत्म हो रहे कार्यकाल को बढ़ा कर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने की सरकारी कवायद को झटका दिया है। कोर्ट ने 13 जुलाई तक सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि असांविधानिक हो चुके नियमों के तहत ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते हैं।

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कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि किन हालातों में अस्तित्वहीन प्रावधानों के तहत ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह आदेश व टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर दिया है।
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उधर, सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रुकी हुई है। 
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याची ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने वाले 25 और 26 मई को जारी शासनादेशों को रद्द कर समयबद्ध चुनाव कराने के लिए याचिका दाखिल की है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कार्यकाल खत्म होने के बाद छह माह से ज्यादा चुनाव नहीं टाला जा सकता है। प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का प्रावधान पहले ही असांविधानिक घोषित हो चुका है। कोर्ट ने याची को ओबीसी कमीशन को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी है।

 

तार्किक कारण न बताने पर हाजिर होना पड़ेगा

कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामे के माध्यम से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में अस्तित्वहीन प्रावधान के तहत प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया गया।  साथ ही चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी कोई तार्किक कारण नहीं बता सके तो उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा। इसके बाद कोर्ट अवमानना की कार्यवाही पर विचार करेगी।

पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के अंतर्गत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। 

25 और 26 मई 2026 के जिन आदेशों के आधार पर सरकार ने कार्यकाल खत्म होने के बावजूद प्रधानों को ग्राम पंचायत के कार्य संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है, वह प्रेम लाल पटेल के मामले में पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश से असांविधानिक घोषित हो चुके हैं।

 

सरकार बोली-ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार

राज्य सरकार की ओर से अपर स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया गया है। आयोग जिलों में जाकर आबादी का आंकड़ा जुटाएगा और उसी आधार पर आरक्षण तय होगा। यह प्रक्रिया पूरी करने में समय लग रहा है।

25 व 26 मई को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश

इन आदेशों के तहत सरकार ने मौजूदा 57,694 ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें चुनाव होने तक मौजूदा प्रधान नीतिगत मामलों को छोड़कर गांव में सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी विकास कार्य संचालित करते रहेंगे। 

हालांकि, उन्हें कोई भी कार्य कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिये जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। जबकि, पहले ग्राम पंचायत का कार्यकाल खत्म होने के बाद यह जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी(पंचायत) निभाया करते थे।

26 मई को पूरा हो चुका ग्राम पंचायतों का कार्यकाल

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। जबकि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा।

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