पीपली II: रातोंरात इंटरनेशनल हुआ यूपी का ये गांव
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे जबरौली क्या पहुंचे, गांव की किस्मत ही रातोंरात बदल गई।
जिन सुविधाओं का गांव के लोगों ने दशकों से इंतजार था, वे उन्हें बिन मांगे ही मिल गईं। अब यह गांव अचानक से पीपली लाइव को साकार कर रहा है।
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे जबरौली में जैसे ही क्लिंटन के कदम पड़े, मीडिया का तांता लग गया। गांव की दीवारों पर ऐसी चमक, सड़क पर गड्ढों के नामोनिशान भी गायब...मानो ये गांव बुधवार को ही बनाया गया हो।
गांव के लोग भी अपने जबरौली की ये तस्वीर देख आश्चर्यचकित हो गए और क्लिंटन के नाम से भी अनजान ये लोग उनके दीदार को टूट पड़े। खादी के
ये भी जश्न की वजह
मोहनलालगंज इलाके के जबरौली के लोग इसलिए भी खुश हैं कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के आगमन से उनके गांव में वर्षों बाद बिजली के दो-तीन नए खंभे लग गए।
इसकी मांग ग्रामीण कई वर्षों से कर रहे थे। साथ ही कार्यक्रम स्थल के पास लोहे के तार हटाकर एबीसी लगाए गए। आए दिन खराब होने वाले ट्रांसफार्मर की मरम्मत हो गई।
रायबरेली रोड से जबरौली तक करीब चार किलोमीटर सड़क का पैचवर्क करने के बाद दोनों किनारे के गड्ढे पाट दिए गए। दर्जनों मजदूर शाम तक जूझे तब आधे गांव की अर्से से पटी पड़ी नालियां साफ हो पाईं। नेता से लेकर पुलिस तक सब सज संवर कर यहां पहुंच गए।
इतनी तेजी से पहले क्यों नहीं हुआ काम?
कई राजमिस्त्री पूर्व माध्यमिक विद्यालय के उखड़े प्लाटर व दरारों को भरने और 15-20 मजदूर भवन की पुताई-रंगाई में जुटे थे।
मंगलवार रात भर दो जेसीबी लगाकर विद्यालय से सटे खाली खेत को वीआईपी पार्किंग के लिए तैयार किया। बल्लियां बांधकर सुरक्षा घेरा बनाया गया।
डीआईजी, डीएम, एसएसपी सहित विभिन्न विभागों के अफसरों की भीड़ ने बुधवार को घंटों तैयारियों का जायजा लिया।
ग्राम प्रधान राजकपूर साहू व सेवानिवृत्त अध्यापक बीके वर्मा कहते हैं कि बिल क्लिंटन के आने से गांव की शान बढ़ेगी। हालांकि, सवाल यह है कि अखिलेश सरकार ने ये तेजी पहले क्यों नहीं दिखाई।
क्लिंटन ने दी ये सौगात
क्लिंटन फाउंडेशन के कार्यक्रम के तहत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने जबरौली में दो घंटे जबरौली में बिताए।
कार्यक्रम का आयोजन पूर्व माध्यमिक विद्यालय में हुआ। डीएम राजशेखर के मुताबिक, तीन ग्रुप में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मदर चाइल्ड हेल्थ ग्रुप की महिलाओं व कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों से मिलने के साथ बिल क्लिंटन ने स्वयं सहायता समूह की गतिविधियां देंखीं।
क्लिंटन फाउंडेशन डायरिया जैसी बीमारी से बच्चों को हो रही दिक्कत, उनके स्वास्थ्य पर डायरिया के दुष्परिणाम, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के प्रयास का क्लिंटन फाउंडेशन द्वारा अध्ययन किया जा रहा है। रेंडम आधार पर जबरौली गांव को चुना गया है।