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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Assembly Session Today: Samajwadi Party Leader Akhilesh Yadav Starts March News in Hindi

UP Vidhan Sabha Session: सपा ने खत्म किया धरना, सत्र के पहले दिन पूर्व विधायक के निधन पर जताया शोक

Mon, 19 Sep 2022 07:38 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 19 Sep 2022 07:38 PM IST
सार

यूपी में विधान सभा सत्र के पहले दिन सभी सदस्यों ने पूर्व विधायक अरविंद गिरी के निधन पर शोक व्यक्त किया। सपा ने सत्र का बहिष्कार किया और पदयात्रा रोके जाने से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी विधायक व कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और छद्म विधानसभा का आयोजन कर शोक व्यक्त किया। कुछ देर बाद सपा का धरना समाप्त हो गया।

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UP Assembly Session Today: Samajwadi Party Leader Akhilesh Yadav Starts March News in Hindi
पदयात्रा के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सोमवार को पैदल मार्च किया। पुलिस ने रोका तो प्रदर्शन किया। सड़क पर धरना देने बैठ गए। विधानसभा नहीं पहुंच पाने पर सड़क पर ही छद्म विधानसभा लगाई और वंदेमातरम के साथ गोला विधायक को श्रद्धांजलि दी। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। विपक्ष को विरोध दर्ज कराने से रोक रही है।

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सपा ने सोमवार को पार्टी कार्यालय से विधानसभा तक पैदल मार्च कर एलान किया था। सुबह करीब नौ बजे से पार्टी कार्यालय पर विधायकों केआने का सिलसिला शुरू हुआ। एक तरफ विधायक पार्टी कार्यालय में जा रहे थे तो दूसरी तरफ कार्यालय से लेकर पूरे विक्रमादित्य मार्ग को छावनी बना दिया गया। बल्लियां लगाकर बैरिकेडिंग की गई। करीब 10 बजे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में हाथ में सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए विधायक आगे बढ़े।
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विधायकों के हाथ में बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं के शोषण, कानून व्यवस्था की बदहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र की दुर्व्यवस्था, बिजली संकट, नौजवानों के साथ हो रहे अन्याय, किसानों की समस्याओं और समाजवादी पार्टी नेताओं पर लगाए जा रहे फर्जी मुकदमों के विरोध में लिखी तख्तियां  थीं। वे गौतमपल्ली थाने के पास पहुंचे तो पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ने जुलूस के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से वीवीआईपी गेस्ट हाउस होते हुए विधानसभा जाने की बात कही, जबकि सपाइयों का कहना था कि उन्होंने राजभवन के सामने से होते हुए विधान सभा के गेट नंबर एक से प्रवेश करने की अनुमति ली है। इस बात को लेकर सपा और पुलिस कर्मियों में तीखी झड़प हुई।
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विवाद इतना बढ़ा कि धक्का मुक्की की नौबत आ गई। पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगा सपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। सदन नहीं पहुंच पाने पर उन्होंने धरना स्थल पर ही छद्म विधानसभा लगाई और गोला गोकर्णनाथ के विधायक अरविंद गिरी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्टी कार्यालय लौट गए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय, रविदास मेहरोत्रा, ओम प्रकाश सिंह, स्वामी ओमवेश, नफीस अहमद, रागिनी सोनकर, पंकज पटेल सहित अन्य सभी विधायक मौजूद रहे।

 

 

 


 
पहले भी सपा लगा चुकी है छद्म विधानसभा
सियासी जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी इससे पहले 2006 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में छद्म विधानसभा लगा चुकी है। उस वक्त भी सरकार का विरोध किया गया था। सोमवार को भी  गौतमपल्ली थाने के सामने छद्म विधानसभा का आयोजन किया गया। सड़क पर सदन की कार्यवाही की शुरूआत अखिलेश यादव द्वारा वंदे मातरम गीत के गायन के साथ हुई, जिसे सभी विधायकों ने दुहराया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने स्पीकर की भूमिका निभाई। विधायक अरविंद गिरि के निधन पर शोक प्रस्ताव रखकर विधायकों ने दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद विधानसभा की कार्रवाई खत्म हो गई।

लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहाकि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र की हत्या की है। सदन की कार्यवाही में शामिल होना विधायकों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार भारी फोर्स लगाकर विधायकों को कार्यवाही में शामिल न होने दें। भाजपा सरकार इससे साबित कर रही है कि वह जनाक्रोश से डरकर कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। सत्ता जितनी कमजोर होती है, दमन उतना ही अधिक बढ़ता है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार क्यों विपक्ष का सामना नहीं कर पा रही है? सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एलान किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी सदन और सड़क का रास्ता अपनाएगी। भाजपा सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेगी। किसानों, नौजवानों के हक के लिए निरंतर आंदोलन चलाएगी।


 

विधान परिषद में सोमवार को यूपी बोर्ड की मान्यता के नियमों में प्रस्तावित संशोधनों पर सपा सदस्यों ने हंगामा किया। उन्होंने सरकार पर शिक्षा के बाजारीकरण का आरोप लगाया और अपना विरोध दर्ज कराते हुए वेल में आ गए। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्य विपक्षी दल के आरोपों को नकारते हुए कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम फैसले ले रही है। मान्यता के नियमों में संशोधनों के लिए सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। इन पर विचार के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा परिषद हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मान्यता के नियमों में बदलाव कर रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के मानक तीन गुने किए जा रहे हैं, ताकि पूंजीपति और बड़ी कंपनियां ही स्कूल खोल पाएं। सपा के ही सदस्य डॉ. मान सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है।

सपा सदस्य लाल बिहारी यादव ने कहा कि मान्यता के लिए अभी तक विभिन्न तरह की सिक्योरिटीज के तौर पर 33 हजार रुपये ही लिया जाता था, जोकि अब 11 लाख रुपये किया जाना प्रस्तावित है। मध्यवर्गीय प्रबंधकों को स्कूल खोलने से रोकने की यह चाल है। कंपनियां स्कूल खोलेंगी तो महंगी फीस होने के कारण गरीबों के बच्चे उनमें दाखिला नहीं ले पाएंगे। इतना ही नहीं वित्तविहीन विद्यालयों में परीक्षा केंद्र न बनाने के लिए भी निर्देश दिए जा रहे हैं। एफसीआई के गोदामों में भी परीक्षा कराने की योजना बनाई जा रही है। इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को केंद्र व्यवस्थापक बनाने की व्यवस्था पहले ही खत्म कर दी गई है।

नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड को आगे बढ़ाया जा रहा है। शिक्षा में सुधार के लिए भाजपा की योगी सरकार प्रतिबद्ध है। इस पर लाल बिहारी यादव ने कहा कि मान्यता के लिए 11 लाख रुपये लेने से कौन सी गुणवत्ता बढ़ेगी। इसके बाद सपा के सभी सदस्य वेल में आकर नीचे बैठ गए। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने सदन को व्यवस्थित रूप से चलाने की अपील की।

करीब 10 मिनट बाद सपा सदस्य अपनी सीट पर लौटे तो नेता सदन ने कहा कि वे लोग अपनी आपत्तियां दे दें, उन पर भी विचार होगा। कहा कि डीएम को परीक्षा केंद्र के बाबत अभी सरकार ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं। इस पर लाल बिहारी ने कहा कि वे मंगलवार को उस आदेश को सदन में उपलब्ध करा देंगे। चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर उनकी बात गलत निकली तो सदन से इस्तीफा दे देंगे। पहले की सरकारों में भी शिक्षक विधायकों से सुझाव न लिए जाने की बात आने पर लाल बिहारी ने कहा कि  कम से कम अब तो इस खामी को दुरुस्त कर लिया जाए। इस पर केशव ने कहा कि लाल बिहारी यादव यूपी में पहले रहीं अपनी पार्टी की सरकारों पर तो कम से कम आरोप मढ़ने से बचें।

लखीमपुर में दो बहनों की हत्या और वित्तविहीन शिक्षकों का मुद्दा भी छाया रहा
बसपा सदस्य भीमराव अंबेडकर ने लखीमपुर खीरी में दो सगी बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला उठाते हुए पीड़ित परिवार को मदद और सरकारी नौकरी देने का मांग की। केशव ने घटना को दुखद बताते हुए समुचित मदद किए जाने का भरोसा दिया। सुरेश कुमार त्रिपाठी और ध्रुव त्रिपाठी ने वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सरकार से मदद देने और सेवा नियमावली लागू करने का मुद्दा कार्यस्थगन प्रस्ताव केजरिए उठाया। आकाश अग्रवाल ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार को उठानी चाहिए।

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